उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों मुगल शासक अकबर और पौराणिक पात्र रावण को लेकर दिया गया एक बयान चर्चा का केंद्र बना हुआ है। योगी सरकार के राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने अपने हालिया विवादित बयान पर स्थिति स्पष्ट करते हुए इसे विरोधियों की साजिश करार दिया है। मंत्री का कहना है कि उनके संबोधन के एक छोटे से हिस्से को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है ताकि उनकी छवि धूमिल की जा सके।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा विवाद बाराबंकी में आयोजित महाराणा प्रताप की जयंती के एक कार्यक्रम से शुरू हुआ। इस समारोह में प्रदेश के राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा बतौर वक्ता शामिल हुए थे, जहां नोएडा विधायक पंकज सिंह भी मौजूद थे। महाराणा प्रताप के पराक्रम का बखान करते समय मंत्री की जुबान फिसल गई या संवाद का संदर्भ बदल गया, जिससे उन्होंने कह दिया— “जब पूरा देश अकबर को स्वीकार कर चुका था, तब अकेले रावण ने उन्हें ललकारा था।” महाराणा प्रताप की जगह रावण का नाम लिए जाने वाला यह वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस और विपक्षी हमला
जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, समाजवादी पार्टी समेत तमाम विपक्षी दलों ने मंत्री के सामान्य ज्ञान और इतिहास की समझ पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। इंटरनेट यूजर्स ने भी अकबर (मुगल काल) और रावण (त्रेतायुग) के कालखंडों में हजारों वर्षों के अंतर को लेकर जमकर प्रतिक्रियाएं दीं। देखते ही देखते यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में गरमा गया और सरकार की घेराबंदी शुरू हो गई।
मंत्री की सफाई: “भ्रम फैलाने की कोशिश”
विवाद को बढ़ता देख मंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके भाषण को एडिट करके और अधूरा दिखाकर भ्रामक माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा।”मेरे संबोधन के एक विशिष्ट अंश को राजनीतिक द्वेष के चलते काट-छाँट कर पेश किया गया है। कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए अधूरा वीडियो वायरल कर रहे हैं ताकि जनता के बीच भ्रम पैदा हो सके। महाराणा प्रताप के शौर्य की चर्चा के दौरान मानवीय भूल या संपादन की चतुराई को मुद्दा बनाना गलत है।”
कार्यक्रम की पृष्ठभूमि
बाराबंकी में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में महाराणा प्रताप के संघर्षों को याद किया जा रहा था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह की उपस्थिति ने भी इस आयोजन को खास बनाया था। फिलहाल, मंत्री की सफाई के बावजूद सोशल मीडिया पर इस ‘अकबर बनाम रावण’ वाले बयान की गूंज थमती नजर नहीं आ रही है।

