आगरा: शहर के ऐतिहासिक पालीवाल पार्क में बुधवार की सुबह गायत्री पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों के लिए एक जीवंत क्लासरूम में तब्दील हो गई। स्कूल के कक्षा 8, 9 और 10 के लगभग 100 छात्र-छात्राओं ने ‘प्रकृति भ्रमण’ कार्यक्रम के तहत पर्यावरण की सूक्ष्म बारीकियों को करीब से समझा। यह आयोजन नई पीढ़ी को किताबी ज्ञान से परे प्रकृति के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार बनाने की एक सराहनीय पहल रही।
छांव में मिली जीवन की सीख
सुबह 8:00 बजे शुरू हुए इस भ्रमण में विद्यार्थियों ने अर्जुन, नीम, बकाइन और कृष्ण कदम्ब जैसे वृक्षों की पहचान करना सीखा। विशेषज्ञों ने बच्चों को बताया कि नीम और बकाइन जैसे पेड़ न केवल वायु को शुद्ध करते हैं, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षा कवच का काम करते हैं। भ्रमण के दौरान खिले हुए ‘पीले गुलमोहर’ ने बच्चों का मन मोह लिया।
आक्रामक प्रजातियों पर विशेष चर्चा
भ्रमण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शहरी पारिस्थितिकी के लिए खतरा बन रही आक्रामक प्रजातियों पर केंद्रित था। पर्यावरणविदों ने ‘विलायती बबूल’ के दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की और बच्चों को समझाया कि कैसे कुछ बाहरी प्रजातियाँ हमारी जैव विविधता और जल स्तर के संतुलन को बिगाड़ देती हैं।
बीज संग्रह और जिज्ञासा का माहौल
कृष्ण कदम्ब के वृक्ष को देखकर छात्रों की जिज्ञासा चरम पर रही। बच्चों ने विभिन्न पौधों के बीजों को एकत्रित किया, जिससे उन्हें पौधों के जीवन चक्र और पुनरुत्पादन की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझने का मौका मिला।
विशेषज्ञों का संदेश: प्रकृति ही भविष्य की कुंजी
इस अवसर पर प्रसिद्ध पर्यावरणविद् केसी जैन एवं डॉ. मुकुल पंड्या ने छात्रों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने बढ़ते शहरीकरण और प्रदूषण की चुनौतियों के बीच शहरी हरियाली और वृक्षों के संरक्षण को अनिवार्य बताया। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि प्रकृति से जुड़ाव ही एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य का एकमात्र रास्ता है। इस अनुभव ने विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक नई चेतना जागृत की।

