पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का 93 वर्ष की आयु में निधन, कांग्रेस पार्टी में शोक की लहर

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नई दिल्ली: भारतीय राजनीति की एक बेहद शालीन और कद्दावर शख्सियत, पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का बुधवार को दिल्ली में निधन हो गया।

93 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। गांधी परिवार की बेहद करीबी और कांग्रेस की विश्वसनीय स्तंभ मानी जाने वाली किदवई के निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। बाराबंकी से लेकर दिल्ली तक, उनके समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता अपनी प्रिय नेत्री को याद कर भावुक हैं।

निजामुद्दीन कब्रिस्तान में किया जाएगा सुपुर्दे-खाक

मोहसिना किदवई की अंतिम यात्रा आज दोपहर 3 बजे उनके नोएडा सेक्टर-40 स्थित आवास से शुरू होगी। शाम 5 बजे दिल्ली के ऐतिहासिक निजामुद्दीन कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्दे-खाक किया जाएगा। उनके अंतिम दर्शन के लिए देश के कई बड़े नेताओं के पहुंचने की उम्मीद है।

राजनीतिक सफर: बाराबंकी की बेटी, मेरठ की सांसद

1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में जन्मीं मोहसिना किदवई ने सार्वजनिक जीवन में शुचिता की मिसाल पेश की। उनका चुनावी सफर बेहद शानदार रहा ​वे तीन बार (1978 उपचुनाव, 1980 और 1984) मेरठ से लोकसभा सांसद चुनी गईं। ​वे दो बार छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सदस्य (2004-2016) रहीं।

इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में उन्होंने स्वास्थ्य, शहरी विकास, पर्यटन और नागरिक उड्डयन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला।

​संगठन में भी रहा भारी कद

मंत्रालयों के अलावा मोहसिना किदवई ने कांग्रेस संगठन में भी अहम भूमिका निभाई। वे लंबे समय तक कांग्रेस महासचिव रहीं और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) व केंद्रीय चुनाव समिति की सदस्य के रूप में पार्टी की रणनीतियों में सक्रिय रहीं। वे हज कमेटी की अध्यक्ष के पद पर भी रहीं।

​नेताओं ने दी श्रद्धांजलि: “एक अपूरणीय क्षति”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, “मोहसिना जी बेहद सौम्य और विनम्र स्वभाव की थीं। उनके व्यक्तित्व में सरलता झलकती थी। उनके जाने से कांग्रेस पार्टी को ऐसी क्षति हुई है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। देश के प्रति उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी।”

​मोहसिना किदवई का जाना न केवल कांग्रेस के लिए, बल्कि भारतीय संसदीय इतिहास के एक ऐसे युग का अंत है जहाँ राजनीति में शालीनता और संवाद को सर्वोपरि रखा जाता था।