मथुरा/वृंदावन: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मंगलवार को वृंदावन दौरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन अस्मिता के पुनर्जागरण और ऐतिहासिक संघर्षों के विजयघोष का गवाह बना। मलूक पीठ में आयोजित संत मलूकदास जी की जयंती समारोह में पहुंचे मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इतिहास के पन्नों को पलटते हुए वर्तमान के सांस्कृतिक नवनिर्माण की तस्वीर पेश की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब सनातन समाज एकजुट होता है, तो सदियों पुराने कलंक भी धुल जाते हैं।
1526 से 2026: संभल और अयोध्या के संघर्ष की गाथा
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में इतिहास के कड़वे सच को सामने रखते हुए कहा कि वर्ष 1526 में संभल के हरिहर मंदिर को आक्रांताओं ने निशाना बनाया था, जहाँ कभी 67 तीर्थ और 19 पवित्र कूप थे। उन्होंने 1976 और 1978 के दंगों का स्मरण कराते हुए पिछली सरकारों पर निशाना साधा और कहा कि तब हिंदुओं की जान गई और मुकदमे वापस लिए गए, लेकिन आज वहां कायाकल्प हो रहा है।
अयोध्या का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा, “1528 में जो मंदिर तोड़ा गया था, उसे 500 साल पूरे होने से पहले ही हमने पुनः प्राप्त कर लिया। आज की अयोध्या त्रेतायुग की भव्यता का जीवंत अहसास कराती है, जो संतों की सदियों लंबी तपस्या का मीठा फल है।”
विरासत के बिना विकास अधूरा
मुख्यमंत्री ने विकास और विरासत के संतुलन को वास्तविक प्रगति की धुरी बताया। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम का उदाहरण देते हुए कहा कि जो गलियां कभी संकरी और अव्यवस्थित थीं, आज वहां हजारों श्रद्धालु सुगमता से दर्शन कर रहे हैं। उन्होंने महात्मा गांधी के 1916 के काशी दौरे की याद दिलाते हुए कहा कि बापू ने तब जिस गंदगी पर सवाल उठाए थे, आज वहां की स्वच्छता और भव्यता पूरी दुनिया देख रही है।
सामाजिक समरसता का आधार: रामलीला और संत परंपरा
योगी आदित्यनाथ ने संत रामानंदाचार्य की परंपरा को नमन करते हुए कहा कि इसी धारा ने संत रैदास, कबीर और मलूकदास जैसे महापुरुष दिए, जिन्होंने समाज को जोड़ा। उन्होंने उत्तर भारत की रामलीलाओं को सामाजिक समरसता का सर्वोत्तम उदाहरण बताया, जहाँ जाति और पंथ की दीवारें गिर जाती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “फिल्में कुछ दिन में भुला दी जाती हैं, लेकिन हमारी कथा परंपरा चाहे रामकथा हो या शिव महापुराण करोड़ों वर्षों से जनमानस को प्रेरित कर रही है।”
आंधी-बारिश भी नहीं रोक पाई ‘भक्ति का सैलाब’
मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर शाम करीब 4:15 बजे वृंदावन के पवनहंस हेलीपैड पर उतरा। उनके आगमन से ठीक पहले मथुरा में आए तेज अंधड़ और बारिश ने कार्यक्रम स्थल पर टेंट तक उखाड़ दिए थे, लेकिन श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ।
मलूक पीठ पहुंचने पर आश्रम के महंत राजेंद्र दास ने सीएम का भव्य स्वागत किया और उन्हें श्रीनाथ जी की छवि भेंट की। मुख्यमंत्री ने भी मंच पर उपस्थित संतों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और उनके प्रति अपनी श्रद्धा निवेदित की।

