नई दिल्ली: देश के तीन राज्यों बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 राज्यसभा सीटों के लिए सोमवार को होने वाले मतदान से पहले सियासी पारा चढ़ गया है। क्रॉस-वोटिंग और जोड़-तोड़ की आशंकाओं के बीच ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ की वापसी हो गई है। 37 सीटों में से 26 पर निर्विरोध चुनाव के बाद, अब शेष सीटों के लिए सभी दलों ने अपने विधायकों की किलाबंदी कर दी है।
ओडिशा: रिसॉर्ट और हाजिरी का खेल
ओडिशा की 4 सीटों के लिए मुकाबला सबसे रोचक है। बीजेपी ने अपने विधायकों को पारादीप के एक रिसॉर्ट में सुरक्षित कर दिया है, वहीं कांग्रेस ने सेंधमारी से बचने के लिए अपने विधायकों को बेंगलुरु के रिसॉर्ट में शिफ्ट किया है। बीजेडी (BJD) ने एक अलग रणनीति अपनाई है; पार्टी के सभी विधायकों को पिछले तीन दिनों से हर शाम पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के आवास पर ‘हाजिरी’ लगाने के निर्देश दिए गए हैं। यहाँ चौथी सीट के लिए बीजेपी समर्थित दिलीप रे और बीजेडी-कांग्रेस समर्थित डॉ. दत्तेश्वर होता के बीच सीधी टक्कर है।
बिहार: नीतीश कुमार की एंट्री ने चौंकाया
बिहार की 5 सीटों पर एनडीए का पलड़ा भारी दिख रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राज्यसभा के लिए उम्मीदवारी ने सबको हैरान कर दिया है। एनडीए की ओर से नीतीश कुमार, नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, शिवेश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा मैदान में हैं। विपक्ष की ओर से आरजेडी के अमरेंद्र धारी सिंह उम्मीदवार हैं। यहाँ ओवैसी की पार्टी AIMIM के 5 विधायक ‘किंगमेकर’ की भूमिका में हैं, जिन्हें साधने के लिए तेजस्वी यादव इफ्तार पार्टी के जरिए सक्रिय हो गए हैं।
हरियाणा: निर्दलीय उम्मीदवार ने बढ़ाई बेचैनी
हरियाणा की 2 सीटों पर बीजेपी के संजय भाटिया और कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध मुख्य दावेदार हैं। हालांकि, निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नंदल के मैदान में उतरने से पेंच फंस गया है। क्रॉस-वोटिंग के पिछले अनुभवों को देखते हुए कांग्रेस ने अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश भेज दिया है, ताकि मतदान के दिन तक उन्हें एकजुट रखा जा सके।
सोमवार सुबह मतदान शुरू होगा और शाम तक परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि रिसॉर्ट में की गई घेराबंदी मतदान के समय कितनी कारगर साबित होती है।

