सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के 8 प्रस्‍ताव और उनके राजनैतिक मायने

अन्तर्द्वन्द

हिंदू-मुस्लिम खाई को पाटने की कोशिश

हालांकि डोभाल ने हिन्दू-मुसलमान की खाई को पाटते हुए ये भी कहा कि, “हम सब एक जहाज में हैं, डूबेंगे साथ में और बेड़ा पार भी साथ में होगा. हर भारतीय मन में विश्वास करे कि वो यहां महफूज है और किसी पर भी बात आएगी तो सारे उसके लिए खड़े हो जाएंगे. हम सब एक जहाज में हैं. डूबेंगे साथ में और बेड़ा पार होगा साथ में.” इस कॉन्फ्रेंस के खत्म होने के बाद मीडिया को जो ब्योरा दिया गया है, उसमें सबसे अहम है ये है कि आठ सूत्री प्रस्ताव में से एक में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है. यह प्रस्ताव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की मौजूदगी में इसे पारित किया गया है, इसलिये सरकार ने अब मुस्लिम नेताओं समेत विपक्षी दलों के लिए कोई मौका नहीं छोड़ा है. बेशक प्रतिबंध का आदेश जारी होते ही मोदी सरकार की आलोचना तो होगी लेकिन विपक्ष को जवाब देने या कहें कि उसकी बोलती बंद करने के लिए तब सरकार इस प्रस्ताव की कॉपी दिखाकर उसे चिड़ा रही होगी.

इस कॉन्फ्रेंस में जो प्रस्‍ताव पास किया गया है, उसमें कहा गया है, “पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और ऐसे ही अन्य संगठन, जो देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं, वे एक विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं और हमारे नागरिकों के बीच कलह पैदा कर रहे हैं, उन्हें प्रतिबंधित किया जाना चाहिए और देश के कानून के अनुसार उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए. साथ ही हम दृढ़ता से अनुशंसा करते हैं कि कोई भी व्यक्ति या संगठन अगर किसी भी माध्यम से समुदायों के बीच नफरत फैलाने का दोषी पाया जाए तो कानून के प्रावधानों के अनुसार उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जानी चाहिए.” वैसे पीएफआई को बैन करने की मांग बीजेपी से लेकर आरएसएस के भी कई नेता लगातार करते आये हैं. लेकिन शायद ये उम्मीद तो किसी को भी नहीं होगी कि पीएम मोदी-डोभाल की जोड़ी मिलकर इतना बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेल देगी कि सूफियों की सबसे बड़ी जमात से ही ऐसा प्रस्ताव पास करवा लेगी।

-एजेंसी

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