बंगाली सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाने वाले नंदिता रॉय और शिबोप्रसाद मुखर्जी की सफलता के 25 वर्ष

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मुंबई: भारतीय सिनेमा के मानचित्र पर क्षेत्रीय फिल्मों का डंका बजाने वाले मशहूर फिल्म निर्माता नंदिता रॉय और शिबोप्रसाद मुखर्जी ने बंगाली सिनेमा को एक नई ऊँचाई दी है। उनके बैनर विंडोज़ प्रोडक्शन ने साबित कर दिया है कि अगर कंटेंट दमदार हो, तो भाषा कभी भी व्यावसायिक सफलता के आड़े नहीं आती। पिछले एक दशक में, जहाँ क्षेत्रीय फिल्में मल्टीप्लेक्स तक पहुँचने के लिए संघर्ष कर रही थीं, वहीं विंडोज़ प्रोडक्शन की फिल्मों ने नेशनल मल्टीप्लेक्स चेन में अपनी स्थायी जगह बनाई है।

₹30 करोड़ से अधिक का शानदार कारोबार

आंकड़ों की बात करें तो प्रक्तान, पोस्तो, हामी, बेलाशुरु, रक्तबीज और बोहुरूपी जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर कुल ₹30.39 करोड़ से अधिक की कमाई की है। ये फिल्में केवल त्योहारों के सीजन तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि इन्होंने लंबे समय तक सिनेमाघरों में टिके रहने और बार-बार दर्शकों को खींचने का रिकॉर्ड बनाया है।

25 साल का सफर और अटूट भरोसा

जैसे-जैसे विंडोज़ प्रोडक्शन अपने सफर के 25 वर्ष पूरे कर रहा है, नंदिता रॉय और शिबोप्रसाद मुखर्जी की जोड़ी प्रदर्शकों (Exhibitors) और दर्शकों के बीच ‘विश्वसनीयता’ का ब्रांड बन चुकी है। उनकी फिल्मों की सबसे बड़ी ताकत अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी कहानियों को सार्वभौमिक मानवीय संवेदनाओं के साथ पेश करना है। यह यात्रा इस बात का सशक्त प्रमाण है कि क्षेत्रीय सिनेमा किस तरह मुख्यधारा के मल्टीप्लेक्स का केंद्र बन सकता है।