आगरा : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद और प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत से जुड़े एक चर्चित मामले में आज अदालत के भीतर कानूनी दांव-पेंच और तीखी बहस देखने को मिली। सुनवाई के दौरान कंगना रनौत की पैरवी कर रही उनकी अधिवक्ता सुधा प्रधान ने अदालत के समक्ष पत्रावली में कुछ नए प्रपत्र (दस्तावेज) दाखिल किए।
नियम के मुताबिक, इन प्रपत्रों की एक-एक प्रति (कॉपी) वादी पक्ष को भी मुहैया कराई गई। कोर्ट रूम में नए दस्तावेज पेश होते ही वादी पक्ष के तेवर कड़े हो गए और उन्होंने कंगना रनौत की इस कार्यप्रणाली पर गहरा ऐतराज जताया।
हर तारीख पर नया पैंतरा, मामला टालने की कोशिश: वादी पक्ष
वादी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने कंगना रनौत के इस कदम का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत के सामने अपनी दलील रखते हुए कहा कि हर नियत तारीख पर कंगना रनौत की तरफ से कोई न कोई नया प्रपत्र या अर्जी दाखिल कर दी जाती है। वादी पक्ष का आरोप था कि यह और कुछ नहीं, बल्कि केवल मामले को लंबा खींचने और कानूनी प्रक्रिया को टालने की एक सोची-समझी कोशिश है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने माननीय न्यायालय से आग्रह किया कि अब इस मामले को और ज्यादा आगे न बढ़ाया जाए और अदालत साक्ष्यों के आधार पर इस पर शीघ्र ही अपना अंतिम निर्णय पारित करे।
6 जून 2026 को होगी अंतिम बहस, वकीलों की फौज ने रखी बात
अदालत के भीतर दोनों पक्षों की दलीलों और तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने इस मामले की अंतिम (फाइनल) बहस के लिए आगामी 6 जून 2026 की तिथि तय कर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस तारीख को होने वाली बहस के बाद कोर्ट अपना फैसला सुरक्षित कर सकता है।
आज की इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान वादी पक्ष की तरफ से कानून के कई दिग्गजों ने कमान संभाली।
वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान, राजवीर सिंह, प्रीति कुमारी और बी. एस. फौजदार सहित कई अन्य अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष अपने मुवक्किल के पक्ष में बेहद दमदार कानूनी दलीलें पेश कीं। अब सभी की निगाहें 6 जून को होने वाली फाइनल बहस पर टिकी हैं।


