आगरा के दयालबाग में शुक्रवार की प्रातः कृषि सेवा, रक्षाबंधन की आत्मीय परंपरा और संत सुपरह्यूमन योजना के बच्चों की मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का एक बेहद सुंदर व प्रेरणादायक संगम देखने को मिला। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, नहर के उत्तर में स्थित खेतों में मूंग की निराई-गुड़ाई का कृषि कार्य पूरी निष्ठा के साथ संपन्न हुआ। इस विशेष कृषि सेवा में भाई-बहनों और संत सुपरह्यूमन योजना के नन्हे-मुन्ने बच्चों सहित बड़ी संख्या में उपस्थित जनों ने सहभागिता करते हुए अपने-अपने निर्धारित कार्यों को पूरी तन्मयता से निभाया।
इस कृषि कार्य के दौरान रक्षाबंधन के पावन पर्व की आत्मीय परंपरा भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई गई। बहन राजकुमारी ने गुरु महाराज प्रोफेसर प्रेम सरन सतसंगी साहब तथा रानी साहिबा जी को तिलक लगाकर रक्षा-सूत्र यानी राखी बांधी। इसके पश्चात, रानी साहिबा जी ने प्रेमी भाई गुरुदेव सहाय (राजा जी) को तिलक लगाकर राखी बांधी। रक्षाबंधन की इस पवित्र और आत्मीय परंपरा के दौरान वहां मौजूद सभी लोगों के बीच एक विशेष उल्लास, अटूट श्रद्धा और आनंद का वातावरण साफ दिखाई दे रहा था।
बच्चों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
प्रातःकालीन कृषि सेवा के तुरंत बाद, संत सुपरह्यूमन योजना के बच्चों ने रक्षाबंधन की मूल भावना पर आधारित बेहद सुंदर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। बच्चों ने अपने पूरे उत्साह और सहज अभिव्यक्ति के साथ जब प्रस्तुतियां दीं, तो पूरा माहौल जीवंत हो उठा। वहां उपस्थित सभी जनों ने बच्चों की इन प्रस्तुतियों को बेहद रुचि और प्रसन्नता के साथ देखा तथा तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।
कृषि सेवा के साथ सत्संग और सांस्कृतिक गतिविधियां
दयालबाग का यह प्रातःकालीन कार्यक्रम अपने पारंपरिक और नियमित स्वरूप में पूरी भव्यता के साथ आगे बढ़ा। कृषि सेवा के अंतर्गत एग्रोइकोलॉजी-कम-प्रिसीजन फार्मिंग से जुड़े विभिन्न कार्यों में लोगों ने सामूहिक सहभागिता की। खेतों में पूरी तरह सेवा-भाव के साथ कृषि कार्य करते हुए भाई-बहनों और बच्चों ने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया।
खेतों में हो रहे परिश्रम और सेवा-भाव के बीच रक्षाबंधन की आत्मीय अनुभूति तथा बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण में एक अतिरिक्त प्रसन्नता और आत्मीयता का संचार कर दिया। इस दौरान सभी के मन में संत वाणी गूंजती रही “क्यों सोच करे मन मूरख। प्यारे राधास्वामी हैं रखवारे॥”
निष्काम सेवा, सत्संग, कृषि कार्य और सांस्कृतिक गतिविधियों के इस सुंदर समन्वय ने दयालबाग की शुक्रवार की प्रातः को विशेष रूप से अत्यंत उल्लासपूर्ण और आनंदमय बना दिया। रक्षाबंधन के इस पारिवारिक एवं आत्मीय भाव ने सभी की सामूहिक सहभागिता को और अधिक गहरा और भावपूर्ण बना दिया।
