लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को उस समय बेहद दिलचस्प स्थिति पैदा हो गई, जब विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सत्ता पक्ष के दो मंत्रियों को अनुशासन और जिम्मेदारी का कड़ा पाठ पढ़ा दिया। अपनी निष्पक्ष और संसदीय शैली के लिए मशहूर महाना ने मंत्रियों द्वारा विकास कार्यों को सदन में ‘गिनाने’ और समय सीमा का उल्लंघन करने पर कड़ी नाराजगी जताई।
दिनेश प्रताप सिंह को मिला ‘संवैधानिक’ जवाब:
सदन में चर्चा के दौरान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने अध्यक्ष के ही विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों का जिक्र किया। मंत्री ने संभवतः सरकार की सक्रियता दिखाने के लिए कहा कि उन्होंने खुद फोन कर अध्यक्ष के क्षेत्र के काम करवाए। इस पर सतीश महाना ने तुरंत टोकते हुए सख्त लहजे में कहा, “अगर काम नहीं करवाना है तो पद पर रहने का क्या औचित्य है?” उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्य करना मंत्री का कर्तव्य है, इसे सदन में गिनाना या उपकार की तरह पेश करना गलत है।
नरेंद्र कश्यप पर भी बरसे स्पीकर:
वहीं, एक अन्य मामले में मंत्री नरेंद्र कश्यप बोलने का समय खत्म होने के बावजूद अपनी बात जारी रखे हुए थे। बार-बार मना करने पर भी जब वे नहीं रुके, तो अध्यक्ष महाना ने दो-टूक कहा, “मंत्री जी, अच्छा नहीं लगेगा कि मैं आपका माइक बंद कराऊं।” अध्यक्ष के इस कड़े रुख के बाद सदन में सन्नाटा पसर गया और मंत्री को अपनी सीट पर बैठना पड़ा।
चर्चा में महाना की ‘सख्त’ कार्यशैली:
सतीश महाना द्वारा एक ही दल (बीजेपी) से जुड़े होने के बावजूद मंत्रियों को दी गई यह फटकार राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। सोशल मीडिया पर भी यह वाकया तेजी से वायरल हो रहा है। इसे संवैधानिक पदों की गरिमा और मंत्रियों की जवाबदेही को लेकर एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

