आगरा में गूँजा सनातन का शंखनाद: कमला नगर और विजय नगर में जुटे हजारों हिंदू, संदेश मिला- ‘जाति नहीं, राष्ट्र प्रथम ही पहचान’

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आगरा। सनातन एकता, राष्ट्रबोध और सामाजिक समरसता के संदेश के साथ आगरा के कमला नगर और विजय नगर क्षेत्रों में विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। दोनों आयोजनों में वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि हिंदू समाज को जातियों में बंटकर नहीं, बल्कि “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ संगठित होकर आगे बढ़ना होगा। सम्मेलनों में स्वदेशी, संस्कार, संस्कृति और सामाजिक जागरण को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया गया।

कमला नगर सम्मेलन: “हिंदू सक्रिय रहेगा तभी समाज सुरक्षित रहेगा”

कमला नगर विराट हिंदू सम्मेलन के तत्वावधान में सत्यम पार्क में हुए आयोजन में विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक दिनेश कुमार ने कहा कि हिंदू समाज को देशभक्त, जागरूक और स्वाभिमानी बनकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि यदि हिंदू समाज निष्क्रिय रहेगा तो उसका अस्तित्व और महत्व कमजोर पड़ जाएगा। उन्होंने बताया कि आज 60 से अधिक देशों में संघ की शाखाएं चल रही हैं और हर जगह भारत माता की जय के उद्घोष के साथ राष्ट्र निर्माण का लक्ष्य आगे बढ़ रहा है।

मुख्य अतिथि कथावाचक मृदुलकांत शास्त्री ने कहा कि सनातनी समाज को कमजोर करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। उन्होंने चेताया कि अगर अब भी समाज नहीं जागा तो भविष्य में होने वाले नुकसान के लिए हम खुद जिम्मेदार होंगे। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदुओं को ब्राह्मण, वैश्य, दलित और ठाकुर में बांटकर कमजोर किया जाता है, जबकि हमें केवल “हिंदू” बनकर एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि भारत में मूल रूप से जाति नहीं, वर्ण व्यवस्था रही है।

विशिष्ट अतिथि साध्वी ब्रजकिशोरी ने कहा कि हिंदू समाज के संस्कारों की असली शक्ति मातृशक्ति है। मां सबसे बड़ी गुरु है और समाज को आत्मचिंतन कर जागने की जरूरत है। आचार्य विष्णुदत्त शास्त्री ने भी सनातन एकता का संदेश दिया।

उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष राकेश गर्ग ने बताया कि सम्मेलन में हजारों लोगों ने सहभागिता की और मंच से स्वदेशी अपनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। संचालन श्रुति सिंघल ने किया और धन्यवाद ज्ञापन भारत महाजन ने दिया।

विजय नगर सम्मेलन: “जाति नहीं, राष्ट्र से पहचान बने”

विजय नगर हिंदू सम्मेलन समिति के आयोजन में वृंदावन से आए रसराज दास महाराज ने कहा कि बच्चों और युवाओं को जागरूक करना समय की मांग है। उन्होंने मेवात की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि वहां हिंदुओं की हालत चिंताजनक है। दक्षिण भारत में गौ-तस्करी और पलायन के मुद्दे पर भी उन्होंने समाज को सतर्क रहने का संदेश दिया।

प्रमुख वक्ता क्षेत्रीय कार्यवाहक प्रमोद शर्मा ने कहा कि व्यक्ति की पहचान जाति से नहीं, बल्कि राष्ट्र से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू की पहचान देश के नाम पर होनी चाहिए। भारत ने कभी शोषण और गुलामी का रास्ता नहीं चुना, बल्कि करुणा, मानवता और समरसता का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि भारत का दायित्व है कि वह फिर से विश्व गुरु बने।

भंते धम्म बोधि थैरो ने कहा कि गौतम बुद्ध ने पंचशील और आर्य अष्टांगिक मार्ग के जरिए मानवता को दिशा दी। उन्होंने जातिवाद के अंत को जरूरी बताया। वहीं ब्रह्मकुमारी राज बहन ने पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज को जाग्रत करने पर जोर देते हुए कहा कि हिंदू की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता है।

सम्मेलन में विजय नगर गुरुद्वारा के हरजेन्द्र सिंह और हिमानी चतुर्वेदी ने भी विचार रखे। मंच से गौ-रक्षा का संदेश दिया गया। विजय नगर शाखा के स्वयंसेवक बच्चों ने मल्लखंभ का प्रदर्शन कर सभी का ध्यान आकर्षित किया। संचालन रमन अग्रवाल ने किया और धन्यवाद आयोजन सचिव आलोक आर्य ने दिया।