आगरा: स्वच्छता की तरह अब स्वच्छ हवा में भी आगरा ने नया कीर्तिमान बनाया है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत मंगलवार को घोषित स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 के नतीजों में आगरा ने 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान हासिल किया।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि आगरा ने लगातार तीसरे वर्ष देश के टॉप-3 शहरों में जगह बनाई है। इस तरह आगरा ने स्वच्छ वायु के क्षेत्र में हैट्रिक दर्ज कर देश का पहला शहर बनने का गौरव हासिल किया है
कार्यक्रम में सम्मानित हुआ आगरा
दिल्ली स्थित पर्यावरण भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने अवार्ड प्रदान किए।
आगरा की मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह और नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने यह सम्मान प्राप्त किया।
स्वच्छ हवा के लिए उठाए गए कदम
आगरा नगर निगम ने वायु प्रदूषण नियंत्रण और शहर को स्वच्छ बनाने के लिए कई ठोस कदम उठाए, जिनमें शामिल हैं –
- निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट का वैज्ञानिक निस्तारण
- घर-घर कचरे का पृथक्करण और आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट्स का संचालन
- ग्रीन बेल्ट और हरित पट्टियों का निर्माण
- डंप साइट का पूर्ण उन्मूलन और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण
इन प्रयासों से न केवल वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ बल्कि शहरवासियों को बेहतर और स्वस्थ जीवन स्तर भी मिला।
मेयर और नगर आयुक्त की प्रतिक्रिया
हेमलता दिवाकर कुशवाह, मेयर
“आगरा की जनता ने जिस उत्साह और जिम्मेदारी के साथ अभियान में योगदान दिया है, वह सराहनीय है। यदि नागरिक इसी तरह सहयोग करते रहें तो आने वाले वर्षों में आगरा हर क्षेत्र में देश का अग्रणी शहर बनेगा।”
अंकित खंडेलवाल, नगर आयुक्त
“आगरा की यह ऐतिहासिक उपलब्धि टीम वर्क और जनता के सहयोग का परिणाम है। हमारा लक्ष्य केवल पुरस्कार जितना नहीं है, बल्कि आगरा को देश का सबसे स्वच्छ और स्वस्थ शहर बनाना है।”
राजधानी लखनऊ की पर्यावरणीय सेहत पर नज़र
यूपी की राजधानी लखनऊ की पर्यावरणीय सेहत इस बार स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 में उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 में लखनऊ की रैंकिंग इस बार बड़ी गिरावट के साथ 10 पायदान नीचे खिसक गई है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले 47 शहरों की सूची में लखनऊ 15वें स्थान पर पहुंच गया है। इस बार शहर को कुल 200 में से 179 अंक मिले हैं, जबकि पिछले साल 189 अंक के साथ लखनऊ चौथे स्थान पर रहा था.
तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में रायबरेली ने बेहतर प्रदर्शन किया है और 7वां स्थान हासिल किया है।
यह वार्षिक सर्वेक्षण राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MEFCC ) द्वारा कराया जाता है। इसमें शहरों का मूल्यांकन ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सड़क धूल प्रबंधन, वाहन उत्सर्जन नियंत्रण और औद्योगिक उत्सर्जन में कमी मानकों पर किया जाता है। इन मानकों पर लखनऊ नगर निगम और संबंधित विभागों के प्रयास उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे हैं।
वहीं लखनऊ के प्रदर्शन में गिरावट का कारण नगर निगम की ओर से प्रभावी प्रयासों का अभाव माना जा रहा है। नगर निगम के पर्यावरण अधिकारी के मुताबिक, इसमें केवल नगर निगम ही नहीं, बल्कि आरटीओ, एलडीए और ग्रीन गैस जैसे अन्य विभाग भी जिम्मेदार हैं, जिनकी लापरवाही के चलते अंक कटे हैं। बता दें, साल 2022 में लखनऊ 177.7 अंकों के साथ शीर्ष पर था। जबकि 2023 में पुराने कचरे के 20 टन जमा होने के कारण शहर ने सर्वेक्षण से बाहर होने का विकल्प चुना था।
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