अनशन के चौथे दिन बोले प्रशांत किशोर, यह आंदोलन सिर्फ BPSC के खिलाफ नहीं, बल्कि बिहार की पूरी व्यवस्था के खिलाफ है

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बीते गुरुवार को अनशन पर बैठे प्रशांत ने कहा, “इन लोगों को समझना होगा कि जनता की ताक़त से बड़ी कोई ताक़त नहीं होती. यह तभी होगा जब लोग अपने बच्चों के बेहतर भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए घरों से बाहर निकलेंगे. लोगों को धर्म, जाति और मुफ़्त की चीज़ें मिलने से ऊपर उठना होगा और अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचना होगा.”

प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर प्रशासन उनकी गिरफ्तारी कर भी लेती है, तो भी ये सत्याग्रह जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि अब यह आंदोलन 51 सदस्यीय युवा सत्याग्रह समिति द्वारा आगे बढ़ाया जाएगा. यह समिति बिहार की व्यवस्था में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है. मैं उन 51 समिति के साथ खड़ा हूं, और उनकी मदद करूंगा. अब यह आंदोलन सिर्फ BPSC के खिलाफ नहीं है, बल्कि बिहार की पूरी व्यवस्था के खिलाफ है.

रजाई और कंबल में बैठने से बिहार नहीं सुधरेगा

प्रशांत किशोर ने साफ़ कहा, हमारा संघर्ष एक युवा नेतृत्व वाली जन शक्ति के रूप में जारी रहेगा. सरकार चाहे कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, जन बल से अधिक कोई बल नहीं है. इन युवाओं की कमिटमेंट मेरी अपेक्षा से कहीं ज्यादा मजबूत है. उन्होंने बिहार के लोगों से आह्वान करते हुए कहा, यह लड़ाई सिर्फ BPSC की नहीं, यह बिहार की व्यवस्था को सुधारने की है. युवाओं का इस संघर्ष में साथ देना आवश्यक है. हम सिर्फ गांधी मैदान में बैठकर नहीं, बल्कि सत्याग्रह के मार्ग पर चलकर बिहार के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं. हम आपको आमंत्रित करते हैं कि आप हमारे साथ आएं और इस आंदोलन को अपना समर्थन दें.

बिहार सिविल सेवा आयोग (बीपीएससी) के अभ्यर्थियों की मांग के समर्थन में प्रशांत किशोर पटना में आमरण अनशन पर बैठे हैं. रविवार को उनके अनशन का चौथा दिन है.

13 दिसंबर को बिहार में हुई बीपीएससी की परीक्षा में धांधली के आरोप लगे हैं और पटना के बापू परीक्षा परिसर में प्रश्नपत्र के देरी से मिलने का परीक्षार्थियों ने आरोप लगाया है.

परीक्षा दोबारा कराए जाने की मांग को लेकर 18 दिसंबर से ही अभ्यर्थी पटना के गर्दनी बाग में आंदोलन कर रहे हैं.
हालांकि बापू परीक्षा परिसर के परीक्षार्थियों की दोबारा परीक्षा शनिवार को ली गई. लेकिन अनशन पर बैठे प्रशांत किशोर ने सभी अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा कराए जाने की मांग का समर्थन किया है. छात्र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से वार्ता करने की मांग कर रहे हैं.

प्रशांत किशोर ने कहा है कि जब तक मुख्यमंत्री परीक्षार्थियों से संवाद नहीं करते, वह अनशन नहीं तोड़ेंगे. समाचार एजेंसी पीटीआई से प्रशांत किशोर ने रविवार को कहा कि ‘अगर जनता को न सुनने पर सरकार अपनी ज़िद पर अड़ी है तो हम भी ज़िद पर अड़े हुए हैं.’