नई दिल्ली/उन्नाव। उन्नाव रेप मामले में आरोपी और निष्कासित भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित होने के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्ष ने इस फैसले पर कड़े सवाल उठाते हुए इसे न्याय के साथ समझौता बताया है। इस बीच, पीड़िता ने भावुक और तीखा बयान देते हुए सेंगर को फांसी दिए जाने की मांग की है। पीड़िता ने कहा कि मौजूदा हालात उसे “फूलन देवी बनने” पर मजबूर कर सकते हैं।
सजा निलंबन के विरोध में पीड़िता के परिवार और विभिन्न महिला संगठनों ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पीड़िता ने निर्भया मामले का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह उस केस में दोषियों को सजा मिली, उसी तरह सेंगर को भी फांसी दी जानी चाहिए।
पीड़िता ने कहा, “कोर्ट के फैसले ने देश की बेटियों को डरा दिया है। अब लगता है कि हमें, हमारे परिवार या बच्चों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। जब तक जान है, मैं यह लड़ाई लड़ती रहूंगी। मैं आत्महत्या नहीं करूंगी, बल्कि अपने परिवार और बच्चों के लिए जिऊंगी और आखिरी सांस तक सेंगर से लड़ूंगी। यह स्थिति मुझे फूलन देवी बनने पर मजबूर कर देगी।”
पीड़िता ने आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए आशंका जताई कि सेंगर अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतारना चाहता है। उन्होंने कहा कि सेंगर के रिश्तेदार प्रभावशाली और बाहुबली प्रवृत्ति के हैं। यदि ऐसे परिवार को राजनीतिक संरक्षण या टिकट दिया गया, तो यह उनके साथ घोर अन्याय होगा।
पीड़िता ने अपने पिता के साथ हुई घटनाओं को याद करते हुए आरोप लगाया कि मारपीट करने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने उनके पिता को ही झूठे आरोपों में जेल भेज दिया। बाद में उनके पिता की हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा कि इंसाफ के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ा, लेकिन अंततः सच्चाई की जीत हुई और सेंगर को जेल जाना पड़ा।
इस मामले में सजा निलंबन के फैसले ने एक बार फिर न्याय व्यवस्था, पीड़ित सुरक्षा और राजनीतिक संरक्षण जैसे गंभीर सवालों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।

