नई दिल्ली। प्रसिद्ध संगीतकार और ऑस्कर विजेता एआर रहमान के एक हालिया इंटरव्यू के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इंटरव्यू में रहमान ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में उन्हें बॉलीवुड में पहले के मुकाबले कम काम मिला है और सत्ता में बदलाव का असर रचनात्मक माहौल पर सकारात्मक नहीं रहा। उनके इस बयान के बाद फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।
रहमान के बयान को लेकर विपक्षी दलों ने समर्थन जताया है, जबकि बीजेपी से जुड़े नेताओं ने इसे लेकर सवाल उठाए हैं।
अखिलेश यादव ने किया समर्थन
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एआर रहमान के समर्थन में बयान देते हुए कहा कि वह रहमान के बड़े प्रशंसक रहे हैं। उन्होंने कहा कि रहमान के गाने रिलीज होने से पहले ही म्यूजिक चार्ट में शीर्ष पर पहुंच जाते थे। अखिलेश यादव ने कहा कि एआर रहमान देश-दुनिया के बड़े कलाकार हैं और कला, संगीत व संस्कृति को धर्म या भेदभाव के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
बिहार मंत्री दिलीप जयसवाल ने बयान को बताया निराधार
बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जयसवाल ने एआर रहमान के बयान को खारिज करते हुए कहा कि कुछ लोगों के दिमाग में बेवजह हिंदू-मुस्लिम की बातें घूमती रहती हैं। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी कोई स्थिति नहीं है और सरकार सबका साथ, सबका विकास की नीति पर काम कर रही है।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने जताई चिंता
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि अगर ऑस्कर विजेता कलाकार यह कह रहा है कि उसे काम नहीं मिल रहा, तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को धर्म के आधार पर काम से वंचित होना पड़ रहा है, तो यह पूरे देश के लिए गंभीर सवाल खड़ा करता है।
एआर रहमान के बयान के बाद अब यह मुद्दा केवल फिल्म जगत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

