जिलाधिकारी ने लिया संज्ञान,जल्द हो सकती है बड़ी कार्यवाही
विद्यालयों का सरकारी धन जाता है सिण्डिकेट खाते में
पीपीए किसी और के नाम का और बचत ख़ाता है सिण्डिकेट का
अरुन कुमार जसराना के नाम से है सिण्डिकेट का बचत खाता,आखिर कौन है इसका मास्टर माइंड
आखिर कौन है अरुन कुमार,विभाग में कितनी गहरी है जड़ें,कब होगी कार्यवाही
जसराना में बैठकर नारखी और टूंडला का चलाता है सिण्डिकेट का ख़ाता
सिण्डिकेट सरगना तक कैसे पहुंचेगा शिक्षा विभाग, आखिर कब करेगा कार्यवाही
फिरोजाबाद। जिले के विकास खंड नारखी और टूंडला के विद्यालयों में हजारों रुपयों के फर्जी पीपीए जनरेट कर सरकारी धन को अरुन कुमार जसराना के बचत खाते में भेजा जा रहा है और अरुन के खाते से सिण्डिकेट सरगना सरकारी धन का लगातार आहरण भी कर रहा है ये काम पिछले साल से लगातार जारी है लेकिन विभाग के जिम्मेदारों को इसकी कोई खैर खबर नहीं है। हालांकि राष्ट्रीय समाचार पत्र की मुहिम को जिलाधिकारी रमेश रंजन ने संज्ञान लिया है उम्मीद जताई जा रही है कि इस प्रकरण में जल्द ही कोई बड़ी कार्यवाही की जा सकती है।
जसराना से बैठकर नारखी में चल रहा है सिण्डिकेट
स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया शाखा जसराना के बचत खाता अरुण कुमार के नाम से है और इसी के खाते में विकासखंड नारखी के विद्यालयों में जो फर्जी पीपीए जनरेट होते है उनका सरकारी धन कई विद्यालयों का इसी खाते में इकठ्ठा होता है और इस धन को बकायदा सरगना द्वारा इसे विड्रो किया जाता है। ये सभी साक्ष्य अरुन कुमार के खाते के विवरण में मौजूद है साथ ही सरगना द्वारा आहारित किया गया धन की डिटेल अरुन के खाते में मौजूद है।
क्या सिण्डिकेट सरगना पर विभाग कर पायेगा कार्यवाही
सूत्रों की माने तो सिंडिकेट का सरगना विकासखंड नारखी के एक विद्यालय में ही तैनात है और वह इतना प्रभावशाली है कि उसके कहने पर दर्जनों विद्यालयों के गुरुजन व गुरु माताएं अपने पोर्टल के आईडी व पासवर्ड दे देते हैं और उसी के माध्यम से वो पीपीए जनरेट कर देता है और उसमें अरुन कुमार का खाता नंबर डाल देता है। उनके द्वारा जनरेट किए गए पीपीए में किसका खाता डाला जा रहा है ये किसी को पता नहीं चल पाता है। इस तरह से सरगना अपने कार्य को अंजाम देता है।
राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र डिजिटल लाइव व up18news के भाग 4 में हम आपको उन दर्जनों विद्यालयों के नाम बताएंगे कि इस सिंडिकेट में नारखी और टूंडला के कौन कौन से विद्यालय शामिल है और किस तरह से सरकारी धन के बंदरबाँट के कार्य को अंजाम देते थे ।
रिपोर्ट- JP सिंह