लखनऊ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी कमेटियों के गठन को अनिवार्य बनाने वाले नए नियमों पर बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। मायावती ने नए नियमों का पुरजोर बचाव करते हुए सवर्ण समाज के एक वर्ग द्वारा किए जा रहे विरोध को ‘अनुचित’ और ‘जातिवादी मानसिकता’ का परिणाम बताया है।
नियमों का समर्थन, प्रक्रिया पर सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए मायावती ने कहा कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करने के लिए ‘समानता को बढ़ावा देने वाले नियम, 2026’ एक जरूरी कदम हैं।
हालांकि, उन्होंने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील नियमों को लागू करने से पहले सभी पक्षों को विश्वास में लिया जाना चाहिए था, ताकि देश में सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा न हो।
स्वार्थी नेताओं से सतर्क रहने की अपील
मायावती ने दलितों, पिछड़ों और ओबीसी (OBC) वर्ग के लोगों को भी आगाह किया। उन्होंने अपील की कि ये वर्ग उन ‘बिके हुए’ और स्वार्थी नेताओं के भड़काऊ बयानों में न आएं जो उनकी आड़ में गंदी राजनीति करते हैं। उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी भेदभाव मुक्त शिक्षा व्यवस्था के पक्ष में है।
क्या हैं नए नियम?
बता दें कि 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित नए नियमों के तहत हर उच्च शिक्षण संस्थान में एक इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य है। इस कमेटी में SC, ST, OBC, महिला और दिव्यांग सदस्यों का होना जरूरी है। ये नियम 2012 के पुराने नियमों की जगह लेंगे। उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत कई राज्यों में छात्र इन नियमों के दुरुपयोग की आशंका जताते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं।
शिक्षा मंत्री का आश्वासन
विवाद बढ़ता देख केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी स्पष्ट किया है कि नए ढांचे के तहत किसी का उत्पीड़न नहीं होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नियमों का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार किसी के पास नहीं होगा।

