आगरा। ताजनगरी की साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने बैंकिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। यह गिरोह अब तक 200 से अधिक निर्दोष लोगों के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए करीब 2 से 2.5 करोड़ रुपये का लोन डकार चुका है। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड नारायण चौरसिया उर्फ नितिन चौरसिया को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसके अन्य साथियों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है।
2021 से चल रहा था ठगी का ‘नेटवर्क’
एडिशनल डीसीपी (AdCP) आदित्य कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि आरोपी नितिन चौरसिया साल 2021 से इस काले कारोबार को अंजाम दे रहा था। यह गिरोह हर महीने योजनाबद्ध तरीके से 2-3 नए लोगों को अपना शिकार बनाता था। अब तक की जांच में तीन मुख्य आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हुई है, जिनमें से एक सलाखों के पीछे है।
मोडस ऑपरेंडी: कैसे दिया वारदात को अंजाम?
पुलिस के अनुसार, गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी।
आरोपी असली आधार नंबर के साथ छेड़छाड़ कर उस पर नाम और पता बदल देते थे। एक ही आधार नंबर पर कई फर्जी पहचान तैयार की जाती थीं। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निजी और सरकारी बैंकों से महंगे मोबाइल, एसी, फ्रिज, बाइक और स्कूटी जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान और वाहन फाइनेंस कराए जाते थे। जैसे ही लोन स्वीकृत होता और सामान मिलता, आरोपी उसे तुरंत बाजार में कम कीमत पर बेचकर नकदी हड़प लेते थे।
केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस खुलासे ने बैंकों और फाइनेंस कंपनियों की सत्यापन प्रक्रिया (Verification Process) पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। साइबर क्राइम पुलिस अब इस बिंदु की गहनता से जांच कर रही है कि बिना सही भौतिक सत्यापन के इतने बड़े पैमाने पर लोन कैसे स्वीकृत हो गए। क्या इस खेल में बैंक कर्मचारियों की भी मिलीभगत है? पुलिस इस पहलू पर भी डिजिटल साक्ष्य जुटा रही है।
पुलिस की अगली कार्रवाई
साइबर सेल की टीमें फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही हैं। बैंक खातों और लेनदेन की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि ठगी की सटीक रकम का पता चल सके। पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपने दस्तावेजों के प्रति सचेत रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल साइबर सेल को दें।

