यूपी में खाप पंचायत का फरमान: लड़के–लड़कियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल और हाफ पैंट पर पहनने पर रोक; शादियों के लिए भी घोषित की नई गाइडलाइन

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बागपत। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत में आयोजित खाप चौधरियों की बड़ी पंचायत अपने सख्त सामाजिक फैसलों को लेकर चर्चा में है। पंचायत ने किशोरों (लड़के–लड़कियों) के स्मार्टफोन इस्तेमाल और हाफ पैंट पहनने पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ शादियों के आयोजन को लेकर नई गाइडलाइन लागू की है। खाप का कहना है कि ये कदम पश्चिमी प्रभाव को सीमित करने और पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए जरूरी हैं।

पंचायत के दिशा-निर्देशों के अनुसार 18 से 20 वर्ष से कम उम्र के किशोरों के लिए स्मार्टफोन का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। लड़कों और लड़कियों—दोनों के लिए हाफ पैंट (बरमूडा) पहनने पर रोक लगाई गई है। वहीं, विवाह समारोह मैरिज हॉल की बजाय गांव या घर पर ही करने की सलाह दी गई है। शादी में मेहमानों की संख्या सीमित रखने, फिजूलखर्ची से बचने और व्हाट्सएप के जरिए निमंत्रण भेजने पर जोर दिया गया है।

खाप सदस्य चौधरी ब्रजपाल सिंह ने कहा कि समाज का निर्णय सर्वोपरि है। उनके अनुसार बच्चों को परिवार और बुजुर्गों के साथ रहकर उचित शिक्षा और सामाजिक मार्गदर्शन मिलना चाहिए। “18–20 साल के बच्चों को फोन की जरूरत नहीं है,” उन्होंने कहा, साथ ही यह भी बताया कि फैसलों के पालन के लिए गांवों में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।

दगड़ खाप के चौधरी ओमपाल सिंह ने भी फैसलों का समर्थन करते हुए कहा कि कम उम्र में मोबाइल देने से गलत आदतें पड़ सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नियम केवल लड़कियों पर नहीं, बल्कि लड़कों पर भी समान रूप से लागू होगा और मोबाइल का इस्तेमाल केवल घर तक सीमित रहना चाहिए।

पंचायत में यह भी तय किया गया कि समाज में मर्यादा बनाए रखने के लिए पहनावे में सादगी आवश्यक है। लड़कों को फुल पैंट या पारंपरिक कुर्ता–पजामा पहनने की सलाह दी गई है। शादियों में बढ़ते खर्च और रिश्तों में आ रही दरार पर चिंता जताते हुए खाप ने कहा कि पारंपरिक तरीके से घर पर होने वाले विवाह सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करते हैं।

चौधरी ब्रजपाल सिंह धामा ने संकेत दिया कि ये फैसले केवल बागपत तक सीमित नहीं रहेंगे। अन्य खापों से संपर्क कर इन्हें पूरे उत्तर प्रदेश में लागू कराने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि उद्देश्य युवाओं को संस्कारों और संस्कृति से जोड़ना है, ताकि समाज में अनुशासन और मर्यादा बनी रहे।