राजधानी लखनऊ की वजीरगंज पुलिस ने एक फर्जी आईएएस को गिरफ्तार किया है। आरोपी लग्जरी गाड़ी से घूमकर रौब जमा रहा था। आरोपी के पास से पांच लग्जरी गाड़ियां, लाल-नीली बत्ती, सचिवालय पास, फर्जी आईडी कार्ड समेत अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम सौरभ त्रिपाठी बताया है और वो नोएडा सेक्टर 35 गरिमा विहार का रहने वाला है।
बताया जा रहा है कि, आरोपी सौरभ त्रिपाठी मूलरूप से मऊ के सराय लखंसी का रहने वाला है। पुलिस का कहना है कि, वजीरगंज स्थित कारगिल पार्क के पास बुधवार सुबह वाहन चेकिंग की जा रही थी। तभी एक संदिग्ध कार दिखी। इस पर पुलिस ने देखा कि, चालक कार चला रहा था, जबकि पिछली सीट पर आरोपी सौरभ त्रिपाठी बैठा हुआ था। वहीं, इस दौरान कार में लाल-नीली बत्ती भी थी।
आशंका होने पर पुलिस ने आरोपी से पूछताछ की तो उसने खुद को आईएएस अधिकारी बताते हुए पुलिस से रौब गांठने लगा। इस दौरान उसने कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी बताए। हालांकि, पुलिस ने जब उसकी कार की तलाशी ली तो फर्जी आईडी कार्ड, सचिवालय पास समेत अन्य सामान मिले। आरोपी के पास कार के जाली पेपर और ड्राइविंग लाइसेंस भी मिला।
पुलिस पूछताछ में आरोपी सौरभ त्रिपाठी ने बताया है कि सोसाइटी में उसका रौब बना रहे इसके लिए वह अपने काफिले में एक से बढ़कर एक महंगी गाड़ियों का इस्तेमाल करता था. लाल और नीली बत्ती लगी गाड़ियों के पीछे जब महंगी गाड़ियों का काफिला गुजरता था तो हर कोई उसे एक बड़ा अधिकारी मान बैठता था. पुलिस पूछताछ में आरोपी सौरभ ने बताया है कि उसके काफिले में मर्सिडीज से लेकर डिफेंडर और फॉर्च्यूनर जैसी महंगी और लग्जरी गाड़िया चलती थीं. खास बात ये थी कि वह इन गाड़ियों का इस्तेमाल ड्राइवर और नीली बत्ती के साथ करता था.
सरकारी कार्यक्रमों में भी होता था शामिल
पुलिस की जांच में पात चला है कि आरोपी सौरभ त्रिपाठी बीते कुछ समय में अलग-अलग समय पर कई सरकारी कार्यक्रमों में बतौर आईएएस अधिकारी शामिल होता था. पुलिस की जांच में उसने माना है कि वो कई विभाग की बैठकों में भी अधिकारी बनकर पहुंचता था. इन बैठकों में शामिल होने वाले अन्य अधिकारियों पर वह दबाव डालता और फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश भी करता था. कई बार तो अधिकारियों को उसपर शक भी हुआ था लेकिन उसकी दंबगई के आगे किसी ने कभी कुछ कहा नहीं.
एनजीओ के नाम पर बड़े अधिकारियों से मिला
पुलिस पूछताछ में आरोपी सौरभ ने बताया कि कंप्यूटर साइंस से बीटेक करने के बाद उसने एक एनजीओ बनाया था. इस एनजीओ के नाम पर ही वह कई बड़े अधिकारियों और यहां तक की कई बड़े नेताओं से भी मिला. इन बैठकों के दौरान उसने अफसरों के तौर तरीके पर गौर किया और धीरे-धीरे खुदको भी एक आईएएस अधिकारी के तौर पर पेश करना शूरू कर दिया. सिस्टम को समझने के बाद उसने उसकी कमजोरियों का फायदा उठाना शुरू किया था.
ऐसे पकड़ा गया था फर्जी आईएएस
हुआ कुछ यूं था कि कारगिल शहीद पार्क के पास लखनऊ की वजीरगंज पुलिस वाहनों की चेकिंग कर रही थी. इसी दौरान एक काले रंग की लग्जरी कार में चेक पोस्ट पर पहुंचे शख्स ने खुदको आईएएस बताकर रौब झाड़ने लगा. मौके पर ड्यूटी दे रहे पुलिसकर्मियों को आरोपी ने मुख्यमंत्री के नाम से धमकी दी. कहा कि मैं सबकी शिकायत सीएम साहब से करूंगा. लेकिन इसी दौरान मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों को उसके हावभाव से उसपर शक होना शुरू हो गया. पूछताछ गहराई तो पता फर्जी आईएएस के सारे भेद खुलकर सामने आ गए.
साभार सहित

