सत्ता के हंटर से संतों को न दबाएं…अजय राय ने पीएम को लिखा खुला पत्र, योगी सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल

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​नई दिल्ली/लखनऊ: ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ प्रयागराज में दर्ज पॉक्सो (POCSO) मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर सियासी तूल पकड़ लिया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र या केंद्रीय एजेंसी (CBI) से जांच कराने की मांग की है। अजय राय ने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ से प्रेरित है।

​”आलोचना का जवाब दंडात्मक शक्ति से नहीं”: अजय राय

अजय राय ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि शंकराचार्य पर यह गाज तब गिरी है जब उन्होंने महाकुंभ और माघ मेले की प्रशासनिक अव्यवस्थाओं पर प्रदेश सरकार को घेरा था। पत्र में लिखा गया है कि किसी भी आध्यात्मिक पद की गरिमा को सियासी रंजिश का हथियार बनाना लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ है।

अनुच्छेद 25-26 का हवाला देकर कांग्रेस अध्यक्ष ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का जिक्र करते हुए कहा कि धार्मिक स्वायत्तता का सम्मान होना चाहिए और कानून का उपयोग दमन के लिए नहीं किया जा सकता।

शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि पर उठाए सवाल

​अजय राय ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने वाले व्यक्तियों की पृष्ठभूमि और उनकी परिस्थितियों का निष्पक्ष परीक्षण होना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि इसके पीछे कोई राजनीतिक दबाव या दुर्भावना हो सकती है। अजय राय ने लिखा, “यदि यह प्रकरण पूर्णतः विधिसम्मत है, तो पारदर्शी जांच से सत्य स्थापित होगा, लेकिन यदि यह प्रतिशोध है, तो इसका निराकरण आवश्यक है।”

​योगी सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार

पत्र के माध्यम से अजय राय ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं उन्होंने लिखा ​”भारतीय समाज में यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यवाहियां अनावश्यक कठोरता या प्रतिशोधात्मक भावना से प्रेरित हैं? इससे न केवल राज्य की छवि धूमिल होती है, बल्कि केंद्र सरकार की साख पर भी प्रश्नचिह्न लगता है।”

​धार्मिक समाज में बढ़ती पीड़ा

​कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि शीर्ष धर्माचार्य के विरुद्ध शासन का ऐसा टकराव बना रहा, तो इससे व्यापक धार्मिक समाज में असंतोष और पीड़ा उत्पन्न होगी। अजय राय ने मांग की है कि “दूध का दूध और पानी का पानी” करने के लिए इस मामले की निगरानी किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।