आगरा: नये वित्तीय वर्ष के पहले ही दिन शहर में संजय प्लेस स्थित शहीद स्मारक में प्रवेश पर आगरा विकास प्राधिकरण ने 20 रुपये का टिकट लगा दिया है। अफसरों के साथ ही जनप्रतिनिधियों और विकास प्राधिकरण बोर्ड के गैर सरकारी सदस्यों और तमाम समाजसेवियों की चुप्पी हैरान करती है। इससे यह साबित हो गया है कि प्रशासन में बैठे लोग सुखद और दुखद परिणाम की चिंता किए बगैर जो चाहें वह कर सकते हैं।
शहीद स्मारक पर एंट्री के लिए 20 रुपये की फीस सुबह 8:00 बजे से अपराह्न दो बजे के बीच लगेगी। अभी तक जो गरीब बच्चे शहीद स्मारक पर स्टडी करते थे या एग्जाम के समय में अपना समय काटते थे, रिवीजन करते थे, उन लोगों पर प्रतिबंध लग जाएगा। जो सामाजिक संगठन अपनी सामाजिक गतिविधियों को वहां बिना पैसे के करके समाज को एक दिशा देते थे, उस पर भी प्रतिबंध लग जाएगा।
अच्छा तो ये होता कि शहीद स्मारक जैसे स्थल का व्यापक सौंदर्यीकरण कराकर वहां और लोगों को आकर्षित करते। शहर में आने वाले लोग शहीद स्मारक को देखते और जानते। यह सब करने के बजाय उसकी जगह टिकट लगाना न्यायोचित नहीं है। क्या आगरा विकास प्राधिकरण को शहीद स्मारक में बने हुए हॉल का सौंदर्यीकरण और पुस्तकालय का सुधारने का काम नहीं करना चाहिए था, ताकि नई पीढ़ी हमारे शहीदों के बारे में जान सके और राणा सांगा जैसे प्रकरण और न हों।
हम सभी सामाजिक प्राणियों को शहीद स्मारक पर एंट्री फीस का विरोध करना चाहिए। सरकार से टिकट लगाने की मंशा को भी जानना चाहिए।
-राजीव गुप्ता जनस्नेही, अध्यक्ष लोकस्वर, आगरा।
कला, संस्कृति और साहित्य के साधकों का अप्रत्याशित दमन है, जिससे वे आगरा की एकमात्र कलास्थली जहां शुल्क की चिंता छोड़ बड़े से बड़े आयोजन को अपनी क्षमता के अनुसार सजा लिया करते थे, अब या तो इनकी जेब भरें या फिर सड़कों पर आ जायें।
अलका सिंह शर्मा (संस्थापक निदेशक, नटरांजलि थियेटर आर्ट्स)