प्रयागराज: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश के मौजूदा हालात, रोजगार के संकट और युवाओं की स्थिति पर एक बार फिर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने देश के युवाओं की ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के पास 40 प्रतिशत ऊर्जावान नौजवान हैं और इनके सामने चीन जैसी महाशक्तियां भी कुछ नहीं हैं। इसके बावजूद आज के समय में देश के इन होनहार युवाओं को इस प्रशासनिक सिस्टम ने ‘डेटा के चक्रव्यूह’ में बुरी तरह उलझाकर रख दिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 21वीं सदी पूरी तरह से डेटा की सदी है और दुनिया में सबसे ज्यादा डेटा आज हिंदुस्तान के पास ही है, लेकिन देश का हर युवा अपना कीमती डेटा सोशल मीडिया पर रील्स बनाने में खर्च कर रहा है।
आज देश के केवल 12 प्रतिशत युवाओं को ही ढंग की नौकरी मिल पा रही है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि सोशल मीडिया आज की युवा पीढ़ी के लिए 21वीं सदी का सबसे बड़ा नशा बन चुका है। बीए, एमए और एमएससी जैसी उच्च डिग्रियां हासिल करने वाले युवाओं को भी आज नौकरियां नहीं मिल रही हैं, और उन्हें यह सलाह दी जाती है कि वे ब्लिंकिट या उबर जैसी कंपनियों में जाकर काम करें।
रोजगार के पांचों दरवाजे पूरी तरह बंद
राहुल गांधी ने देश में रोजगार के मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि आज की तारीख में देश के युवाओं के लिए रोजगार के सभी पांचों मुख्य दरवाजे बंद हो चुके हैं:
पहला दरवाजा (मैन्युफैक्चरिंग): नोटबंदी और दोषपूर्ण जीएसटी (GST) प्रणाली के गलत क्रियान्वयन के कारण लेदर, टेक्सटाइल्स और ऑटोमोबाइल जैसे बड़े सेक्टर या तो बंद हो गए हैं या भारी मंदी के दौर से गुजर रहे हैं।
दूसरा दरवाजा (इंटरप्रेन्योरशिप/स्टार्टअप): जिसे सरकार ‘स्टार्टअप इंडिया’ कहती है, वह धरातल पर दम तोड़ चुका है। बैंक छोटे व्यापारियों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को बिल्कुल भी लोन नहीं देते हैं, जबकि अडानी और अंबानी जैसे उद्योगपतियों को पलक झपकते ही लाखों-करोड़ रुपये के कर्ज दे दिए जाते हैं। देश के लगभग 90 फीसदी एमएसएमई सेक्टर को आज तक बैंकों से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिली है।
तीसरा दरवाजा (सरकारी नौकरी): सरकारी नौकरियों का पूरा सिस्टम आज पेपर लीक और धांधली का गंभीर शिकार बन चुका है। वर्तमान हालात यह हैं कि करीब 150 युवाओं में से केवल 1 को ही बमुश्किल सरकारी नौकरी नसीब होती है।
चौथा दरवाजा (पब्लिक सेक्टर): जो सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) 10 साल पहले देश के 14 लाख युवाओं को रोजगार देता था, उसका बड़े पैमाने पर निजीकरण कर दिया गया। प्राइवेट स्कूल और अस्पताल बढ़ते गए, जबकि नवरत्न कंपनियों, बीएसएनएल (BSNL) और एयरपोर्ट्स को बेचकर अडानी जैसे उद्योगपतियों के हवाले कर दिया गया।
पांचवां दरवाजा (आईटी और सॉफ्टवेयर सेक्टर): बैंक और सॉफ्टवेयर का क्षेत्र, जो कभी युवाओं के लिए बड़ी उम्मीद था, उसे अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से लगभग खत्म कर दिया गया है।
इन पांचों दरवाजों पर ताला लग जाने के कारण आज देश के पढ़े-लिखे युवाओं के पास मजदूरी करने के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। इसी व्यवस्था के चलते आज देश का युवा भयंकर मानसिक दर्द झेल रहा है “डेटा आपका है, दर्द आपका है, लेकिन दौलत इनकी है।”
अडानी की संपत्ति और बीजेपी के बैंक बैलेंस पर साधा निशाना
सरकार की आर्थिक नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए राहुल गांधी ने आंकड़े सामने रखे और कहा कि दुनिया के सबसे धनी लोगों की सूची में जो अडानी 10 साल पहले 600वें स्थान पर हुआ करते थे, उनकी संपत्ति इन 10 वर्षों में 30 गुना से भी अधिक बढ़ चुकी है और आज वे दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। इसके विपरीत, भारतीय जनता पार्टी (BJP) का बैंक बैलेंस जो एक दशक पहले महज 150 करोड़ रुपये के आसपास हुआ करता था, वह आज बढ़कर 10 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक हो चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुख्य काम देश के युवाओं को उनके वास्तविक मुद्दों से भटकाना है। वे वोट चोरी करते हैं और देश के युवाओं की सोच व विवेक पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं।
आरएसएस के प्रभाव पर उठाए सवाल
अपने संबोधन के अंत में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आज देश की हर बड़ी संस्था में मोहन भागवत के इशारे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारकों को प्रमुख पदों पर बैठाया जा रहा है। देश के बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में आरएसएस के प्रचारकों को कुलपति (Vice Chancellor) बनाया जा रहा है, ब्यूरोक्रेसी से लेकर मीडिया तक, न्यायपालिका (Judiciary) से लेकर पैरामिलिट्री फोर्सेज तक में हर जगह केवल संघ के प्रचारकों को ही प्राथमिकता के आधार पर प्लांट किया जा रहा है।


