आगरा के यमुना तट पर गूंजा संत रविदास का समरसता संदेश, 500 से अधिक श्रद्धालुओं ने दी आहुति

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संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी महासभा द्वारा किया गया भव्य आयोजन

650वीं जयंती वर्ष पर 21 कुंडीय समरसता महायज्ञ में घुमंतु परिवारों ने भी निभाई भागीदारी

संगोष्ठी में संत रविदास के जीवन-दर्शन पर हुआ मंथन, मुख्य वक्ता थे डॉ किशन वीर सिंह शाक्य

आगरा। संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के “मन चंगा तो कठौती में गंगा” के संदेश और सामाजिक समरसता की भावना से यमुना तट स्थित कैलाश महादेव मंदिर परिसर सराबोर हो उठा। संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी महासभा द्वारा उनकी 650वीं जन्म जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित 21 कुंडीय समरसता महायज्ञ में 500 से अधिक श्रद्धालुओं ने आहुति देकर समाज में समानता, भाईचारे, शांति और सद्भाव की कामना की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए इस आयोजन ने संत रविदास जी के उस संदेश को जीवंत किया कि समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब हर व्यक्ति को समान सम्मान और अवसर मिले।

यमुना मैया के पावन तट पर स्थित कैलाश महादेव मंदिर परिसर में प्रातः आयोजित महायज्ञ में श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ आहुतियां अर्पित कीं। गायत्री परिवार से जुड़े सुरेश चंद्र सक्सेना के मार्गदर्शन में हवन की विधियां संपन्न हुईं। यज्ञ के दौरान संत रविदास जी के आदर्शों को जीवन में उतारने और सामाजिक भेदभाव समाप्त कर समरस समाज के निर्माण का संकल्प लिया गया।

महायज्ञ में घुमंतु परिवारों की सहभागिता बनी विशेष आकर्षण

कार्यक्रम में ग्राम बिचपुरी और सेमरी के 25 घुमंतु परिवारों ने भी सहभागिता की। उनकी सहभागिता ने आयोजन के सामाजिक सरोकार को और व्यापक बना दिया। महासभा के अध्यक्ष रमेश कर्दम और सचिव अभिनव मौर्य ने कहा कि संत रविदास जी का जीवन समाज के अंतिम व्यक्ति तक सम्मान और समानता पहुंचाने की प्रेरणा देता है। ऐसे में समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों की समस्याओं को सामने लाना भी संत रविदास जी के विचारों को व्यवहार में उतारने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

उन्होंने कहा कि महासभा संत रविदास जी की 650वीं जयंती को केवल धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा, समानता और मानव सम्मान के संकल्प वर्ष के रूप में मना रही है।

महायज्ञ के बाद संत रविदास के जीवन-दर्शन पर संगोष्ठी
महायज्ञ के उपरांत यमुना तट पर ही स्थित सभागार में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के व्यक्तित्व, कृतित्व एवं आदर्शों पर आधारित संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने संत रविदास जी के जीवन संघर्ष, भक्ति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता के संदेश पर विस्तार से विचार रखे।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रांत सह बौद्धिक प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश सरकार के सलाहकार डॉ. किशन वीर सिंह शाक्य ने संत रविदास जी के जीवन से जुड़े आध्यात्मिक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके जीवन में अद्भुत आध्यात्मिक चेतना दिखाई देती है। उन्होंने संत रविदास जी की पूर्व जन्मों की स्मृतियों से जुड़े आध्यात्मिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन साधना, आत्मज्ञान और ईश्वर के प्रति अटूट समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी ने अपने जीवन से सिद्ध किया कि मनुष्य की श्रेष्ठता जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्म, चरित्र, भक्ति और विचारों से निर्धारित होती है।

विभाग संचालक राजन सिंह ने कहा कि संत रविदास जी का पूरा जीवन सामाजिक समरसता का संदेश देता है। उन्होंने समाज में व्याप्त ऊंच-नीच और भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाकर प्रत्येक मनुष्य के सम्मान की बात कही। आज उनके विचारों को समाज के व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है।
कैलाश महादेव मंदिर के श्री महंत निर्मल गिरी ने कहा कि संत रविदास जी की भक्ति और साधना ने समाज को आत्मशुद्धि और मानव सेवा का मार्ग दिखाया। उन्होंने बाहरी आडंबरों से अधिक मन की पवित्रता को महत्व दिया। उनका जीवन बताता है कि निर्मल मन और सच्ची भक्ति के माध्यम से ही ईश्वर की अनुभूति की जा सकती है।

विश्व हिंदू परिषद के संगठन मंत्री राजेश ने कहा कि संत रविदास जी ने समाज को जोड़ने और भेदभाव की दीवारों को समाप्त करने का कार्य किया। उनका संदेश आज भी सामाजिक एकता और समरसता के लिए मार्गदर्शक है। संत रविदास जी की शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

वाल्मीकि महापंचायत के तखत चौधरी मान सिंह ने कहा कि संत रविदास जी ने वंचित एवं उपेक्षित वर्गों में आत्मसम्मान और समानता का भाव जगाया। उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि किसी व्यक्ति का मूल्य उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्म और आचरण से होता है। उनके विचार सामाजिक सम्मान और न्याय की मजबूत आधारशिला हैं।

भंते अशोक रत्न ने कहा कि संत रविदास जी के विचारों में मानवता, करुणा और भाईचारे की भावना प्रमुख है। उन्होंने मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने और भेदभाव से ऊपर उठने का संदेश दिया। उनका जीवन शांति, प्रेम और सामाजिक सद्भाव की प्रेरणा देता है।

योगी जहज नाथ ने कहा कि संत रविदास जी ने भक्ति को जनसाधारण से जोड़ते हुए यह संदेश दिया कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए मन की निर्मलता सबसे आवश्यक है। उनका जीवन साधना के साथ-साथ समाज सुधार की प्रेरणा भी देता है।

प्रमोद सिंह ने कहा कि संत रविदास जी का जीवन कर्म, भक्ति और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम है। उन्होंने अपने आचरण से समाज को बताया कि व्यक्ति अपने कर्मों से महान बनता है। आज की युवा पीढ़ी को उनके जीवन और विचारों से प्रेरणा लेकर सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होना चाहिए। संगोष्ठी के हजारों लोगों ने प्रसादी ग्रहण की ।

इन्होंने संभाली व्यवस्था

संगोष्ठी का संचालन प्रचार प्रमुख विजय सामा ने किया।
इस अवसर पर संघटक मनमोहन निरंकारी, सह सचिव डॉ. निष्ठा शर्मा, अभिषेक कोटिया, राकेश नेमीचंद, अशोक चौबे, संजीव चौबे आदि उपस्थित रहे।