आगरा। आगरा के औद्योगिक और व्यापारिक जगत के लिए 1 जुलाई 2026 से एक नई और राहत भरी शुरुआत होने जा रही है। लंबे समय से चली आ रही उद्योग जगत की एक प्रमुख मांग पर मुहर लगाते हुए गेल गैस लिमिटेड ने गैस खपत की गणना के तौर-तरीकों में एक ऐतिहासिक बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब तक उद्योगों के लिए गैस खपत की गणना पिछले छह महीनों के औसत उपभोग के आधार पर की जाती थी, जिसे अब बदलकर सीधे ’80 प्रतिशत डीसीक्यू (डेली कॉन्ट्रैक्ट क्वांटिटी)’ के आधार पर निर्धारित कर दिया गया है।
नेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने इस निर्णय को उद्योगों की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने वाला कदम बताते हुए केंद्र सरकार, गेल गैस प्रबंधन और स्थानीय जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया है।
चैंबर का प्रयास और प्रशासन का सहयोग
चैंबर के अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल और गेल गैस प्रकोष्ठ के चेयरमैन विवेक जैन ने साझा जानकारी देते हुए बताया कि 29 जून 2026 को हुई बोर्ड बैठक के बाद गेल गैस प्रबंधन ने आधिकारिक रूप से ईमेल के जरिए इस बदलाव की सूचना चैंबर को दी।
चैंबर पदाधिकारियों ने बताया कि यह उपलब्धि सामूहिक प्रयासों का नतीजा है। आगरा में गैस आपूर्ति और गणना संबंधी जटिलताओं को दूर करने के लिए मंडलायुक्त नागेन्द्र प्रताप, जिलाधिकारी मनीष बंसल और उपायुक्त उद्योग शैलेन्द्र सिंह ने भी निरंतर पत्राचार कर संबंधित अधिकारियों से शीघ्र समाधान का आग्रह किया था।
उद्योगों पर कम होगा आर्थिक दबाव
चैंबर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल, पूर्व अध्यक्ष मनीष अग्रवाल और चेयरमैन विवेक जैन ने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था से गैस उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला अनावश्यक आर्थिक दबाव काफी हद तक कम होगा। वर्तमान में जो गणना पद्धति लागू थी, उसमें कई व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही थीं। अब 80 प्रतिशत डीसीक्यू के आधार पर गणना होने से उद्योगों के संचालन में पारदर्शिता आएगी और उन्हें बेहतर व्यापारिक माहौल मिलेगा।
इनका रहा विशेष आभार
इस महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव के लिए नेशनल चैंबर ने पेट्रोलियम मंत्री (भारत सरकार), गेल गैस लिमिटेड के सीईओ आशु सिंघल, सीजीएफ जफर खान, मंडलायुक्त नागेन्द्र प्रताप, जिलाधिकारी मनीष बंसल और उपायुक्त उद्योग शैलेन्द्र सिंह के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया है।
चैंबर पदाधिकारियों ने विश्वास जताया है कि प्रशासन और उद्योग संगठनों के इस समन्वित प्रयास से आगरा के औद्योगिक परिदृश्य को नई गति मिलेगी और स्थानीय उद्योग वैश्विक बाजार में अधिक मजबूती से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।


