महंगाई पर सरकार का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक, घरेलू कीमतों को काबू में रखने की तैयारी

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विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने अपनी निर्यात नीति में बदलाव करते हुए इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य आगामी त्योहारी सीजन और भविष्य की जरूरतों के लिए देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना है।

निर्यात नीति में बदलाव: ‘मुक्त’ से ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में चीनी

सरकार की नई नीति के अनुसार, चीनी के निर्यात को अब ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाल दिया गया है। पहले यह ‘मुक्त’ श्रेणी में था, लेकिन अब किसी भी प्रकार के चीनी निर्यात के लिए सरकार की विशेष अनुमति की आवश्यकता होगी। यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों में उछाल का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर न पड़े और देश के भीतर इसके दाम स्थिर रहें।

इन श्रेणियों को मिलेगी निर्यात में छूट

हालांकि सरकार ने निर्यात पर व्यापक रोक लगाई है लेकिन कुछ विशिष्ट श्रेणियों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है:

EU और USA निर्यात: यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका (USA) को CXL और TRQ कोटे के तहत होने वाले निर्यात पर यह रोक लागू नहीं होगी।

AAS स्कीम: एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (AAS) के तहत होने वाले शिपमेंट को भी इससे छूट दी गई है।

खाद्य सुरक्षा: अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए ‘सरकार से सरकार’ (G2G) स्तर पर होने वाले निर्यात की अनुमति दी जा सकेगी।

प्रक्रियाधीन खेप: जो खेप पहले से ही निर्यात की प्रक्रिया में हैं और पोर्ट पर पहुँच चुकी हैं, उन्हें भी इस रोक से छूट दी गई है।

घरेलू बाजार और उपभोक्ताओं पर असर

​विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रतिबंध से घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ेगी, जिससे कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है। पिछले कुछ समय से वैश्विक स्तर पर चीनी के उत्पादन में गिरावट की आशंकाओं के बीच कीमतों में तेजी देखी जा रही थी। भारत, जो कि दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादकों में से एक है, द्वारा निर्यात रोकने से घरेलू स्तर पर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल सकती है।

निर्यातकों के लिए चुनौती, जनता के लिए प्राथमिकता

इस फैसले से चीनी निर्यातकों और मिलों के लिए अल्पावधि में चुनौतियां बढ़ सकती हैं, क्योंकि उनके वैश्विक अनुबंध प्रभावित होंगे। हालांकि, सरकार का रुख स्पष्ट है कि उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराना है। सरकार आने वाले समय में उत्पादन के आंकड़ों की समीक्षा करने के बाद इस नीति पर पुनर्विचार कर सकती है।