नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना (IAF) की मारक क्षमता को वैश्विक स्तर पर और अधिक घातक बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार (27 मार्च, 2026) को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई ‘डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल’ (DAC) की बैठक में रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अतिरिक्त बैटरी खरीदने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है। इस महा-बैठक में कुल 2.38 लाख करोड़ रुपये के रक्षा सौदों को मंजूरी मिली, जो भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण में मील का पत्थर साबित होंगे।
S-400: आसमान में भारत का अभेद्य कवच
भारत ने साल 2018 में रूस के साथ 5 स्क्वाड्रन S-400 के लिए लगभग 40,000 करोड़ रुपये की डील की थी, जिसकी डिलीवरी 2021 से जारी है। अब अतिरिक्त यूनिट्स की मंजूरी से भारत की सीमाएं पूरी तरह ‘नो-फ्लाई ज़ोन’ में तब्दील हो सकेंगी। यह सिस्टम 400 किमी की दूरी से ही दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और ड्रोन्स को ट्रैक कर नष्ट करने में सक्षम है।
वायुसेना का कायाकल्प: नए विमान और इंजन
DAC ने केवल मिसाइल सिस्टम ही नहीं, बल्कि वायुसेना की लॉजिस्टिक और अटैक क्षमता बढ़ाने के लिए भी कई बड़े फैसले लिए हैं:
मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA): पुराने हो चुके AN-32 और IL-76 के बेड़े को बदलने के लिए नए ट्रांसपोर्ट विमान खरीदे जाएंगे, जो रणनीतिक एयरलिफ्ट क्षमताओं को बढ़ाएंगे।
रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट: आक्रामक जवाबी कार्रवाई और खुफिया निगरानी (Reconnaissance) के लिए घातक स्ट्राइक ड्रोन्स को मंजूरी दी गई है।
Su-30 एयरो इंजन: सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के इंजनों के ओवरहॉल और रखरखाव के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है।
थल सेना के लिए ‘स्वदेशी’ और ‘सटीक’ ताकत
भारतीय सेना की जमीनी ताकत को मजबूती देने के लिए भी पिटारा खोला गया है:
धनुष गन सिस्टम: सेना की आर्टिलरी पावर को बढ़ाने के लिए स्वदेशी ‘धनुष’ तोपों की खरीद को मंजूरी मिली है, जो हर तरह के मौसम और दुर्गम इलाकों में सटीक निशाना साध सकती हैं।
एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम: यह सेना को रीयल-टाइम एयर डिफेंस कंट्रोल और रिपोर्टिंग की सुविधा देगा।
हाई कैपेसिटी रेडियो रिले: युद्ध के मैदान में निर्बाध और सुरक्षित संचार सुनिश्चित करने के लिए हाई-टेक रेडियो सिस्टम खरीदे जाएंगे।
रणनीतिक महत्व
2.38 लाख करोड़ रुपये का यह निवेश न केवल सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत घरेलू रक्षा उत्पादन को भी गति देगा। खासकर S-400 की अतिरिक्त खरीद यह संकेत देती है कि भारत अपनी लंबी दूरी की रक्षा प्रणालियों पर कोई समझौता नहीं करना चाहता।


