20 साल का हिसाब दें सचिव…आगरा शाही जामा मस्जिद सदर मोहम्मद जाहिद का पलटवार, वक्फ बोर्ड से की रिसीवर नियुक्त करने की अपील

स्थानीय समाचार

आगरा। ताजनगरी की ऐतिहासिक जामा मस्जिद की इंतजामियां कमेटी (इस्लामिया लोकल एजेंसी) के भीतर का विवाद अब सार्वजनिक हो गया है। शब-ए-बारात के मौके पर आयोजित एक प्रेस वार्ता में अध्यक्ष मोहम्मद जाहिद ने सचिव आजम खान मलिक के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए भ्रष्टाचार, हेराफेरी और विकास कार्य रोकने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।

सजावट पर छिड़ा ‘क्रेडिट वॉर’

शब-ए-बारात के अवसर पर जामा मस्जिद में की गई शानदार लाइटिंग को लेकर अध्यक्ष मोहम्मद जाहिद ने कहा कि पिछले 4 वर्षों से वे अपने निजी खर्च से मस्जिद को रोशन कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सचिव आजम खान मलिक कभी मस्जिद नहीं आते और न ही उन्हें मस्जिद के कार्यों में कोई दिलचस्पी है।

​भ्रष्टाचार और हेराफेरी के संगीन आरोप

​अध्यक्ष मोहम्मद जाहिद ने मीडिया के सामने सचिव पर आरोपों की झड़ी लगा दी-

वित्तीय अनियमितता: किराया वसूली में हेराफेरी और मस्जिद के फंड का हिसाब न देने का आरोप।

विकास में बाधा: मस्जिद के विकास कार्यों को जानबूझकर रोकने और अवाम को गुमराह करने का दावा।

पूर्व कर्मचारी पर हमला: पूर्व कर्मचारी अरशद यानी पर अवैध वसूली और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया, जिसे वर्तमान सचिव का संरक्षण प्राप्त होने की बात कही गई।

​विरासत पर सवाल: जाहिद ने कहा कि यदि वर्तमान सचिव के पास गिनाने को कोई काम नहीं है, तो वे अपने पिता के 20 साल के कार्यकाल का ही कोई काम गिना दें।

​’कमेटी भंग कर नियुक्त हो रिसीवर’

​अध्यक्ष ने साफ किया कि वक्फ बोर्ड द्वारा जारी नोटिस का जवाब उन्होंने 30 जनवरी तक दाखिल कर दिया है। उन्होंने बोर्ड से मांग की है कि:

अध्यक्ष और सचिव दोनों के खिलाफ FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।

वर्तमान कमेटी को तत्काल भंग कर दिया जाए।

शासन या वक्फ बोर्ड द्वारा मस्जिद की देखरेख के लिए एक रिसीवर (प्रशासक) नियुक्त किया जाए।

हटाए जाने की खबरों को बताया बेबुनियाद

अपने पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर जाहिद ने कहा कि उन्हें अध्यक्ष पद से हटाए जाने की बातें महज अफवाह हैं। उन्होंने चुनौती दी कि यदि बोर्ड की ओर से ऐसा कोई पत्राचार हुआ है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सचिव अपने सदस्यों के साथ मिलकर अवाम के बीच भ्रम फैला रहे हैं।