नेपाल की बहू, भारत की निवासी… फिर भी क्यों नहीं बन सकतीं वोटर? सीमावर्ती जिलों के हजारों परिवारों के लिए चुनाव आयोग का बड़ा अपडेट

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उत्तर प्रदेश में चल रही मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के बीच नेपाल से शादी कर भारत आई महिलाओं को लेकर स्थिति साफ हो गई है। ऐसी नेपाली महिलाएं, भले ही भारत में रह रही हों, सीधे मतदाता नहीं बन सकतीं। वोटर सूची में नाम जुड़वाने के लिए उन्हें पहले भारतीय नागरिकता लेनी होगी। यानी वैध रूप से यहां निवास करने के बावजूद उन्हें मतदान का अधिकार तब तक नहीं मिलेगा, जब तक नागरिकता हासिल न हो जाए।

हालांकि, तय शर्तें पूरी होने पर ऐसे दंपतियों के बच्चों को भारतीय नागरिक माना जाएगा और वे मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं। सीमावर्ती जिलों जैसे सिद्धार्थनगर, महराजगंज, बलरामपुर, गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत में बड़ी संख्या में भारत-नेपाल के बीच विवाह संबंध हैं, जिन्हें आम तौर पर रोटी-बेटी के रिश्ते के रूप में देखा जाता है।

चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल से शादी कर भारत आई महिलाएं यहां की वैध निवासी तो मानी जाती हैं, लेकिन वे स्वतः भारतीय नागरिक नहीं हो जातीं। विवाह के बाद नागरिकता लेने के लिए उन्हें भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत आवेदन करना होता है। इसके लिए विवाह पंजीकरण, वैध मैरिज सर्टिफिकेट और कम से कम सात साल तक भारत में लगातार रहने का प्रमाण जरूरी है।

यह प्रक्रिया जिलाधिकारी स्तर से शुरू होकर राज्य और केंद्र के गृह विभाग तक जाती है। आवासीय दस्तावेजों के जरिए सात साल के निरंतर निवास को साबित करना अनिवार्य होता है।

जन्म के आधार पर नागरिकता के नियम

भारत में जन्म के आधार पर नागरिकता के नियम भी समय के साथ बदले हैं।

1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे लोगों को जन्म के आधार पर स्वतः नागरिक माना जाता है।

1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे व्यक्ति को तभी नागरिक माना जाएगा, जब माता या पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हो।

2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे बच्चों के लिए शर्त है कि एक अभिभावक भारतीय नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो, यानी वैध रूप से भारत में रह रहा हो।

भारत और नेपाल के बीच संधियों के कारण नेपाली नागरिक भारत में वैध रूप से रह सकते हैं, लेकिन मतदान का अधिकार सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही मिलता है। यही वजह है कि नेपाली बहुओं को वोटर बनने से पहले नागरिकता की कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।