आगरा में ‘आलोकनामा’ की गूँज: कवि आलोक श्रीवास्तव ने शब्दों से बुना सपनों का सफ़र, श्रोताओं को कराया आत्मबोध

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आगरा। जब मंच पर शब्द केवल कहे नहीं जाते, बल्कि महसूस किए जाते हैं, तब प्रस्तुति एक आयोजन नहीं, अनुभव बन जाती है। ऐसा ही अनुभव होटल हॉलीडे इन में देखने को मिला, जहां स्पाइसी शुगर संस्था के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध कवि एवं लेखक आलोक श्रीवास्तव ने अपने विशिष्ट कहानी-पाठ ‘आलोकनामा – सपनों का सफ़र’ के माध्यम से श्रोताओं को आत्मचिंतन, संघर्ष और सपनों की गहराइयों तक ले गया।

कार्यक्रम की शुरुआत आलोक श्रीवास्तव द्वारा रामलीला की पंक्तियां गुनगुनाने से हुई “रामलीला को गुनगुनाने चले…”
और यहीं से उन्होंने जीवन, आस्था और आत्मविश्वास की उस यात्रा का सूत्रपात किया, जिसमें हर पड़ाव पर अनुभव और सच्चाई खड़ी थी।

अपने संवाद में उन्होंने कहा कि जीवन का सफ़र कई बार पेंगुइन की चाल की तरह डगमगाता है, लेकिन जो व्यक्ति सब कुछ छोड़कर अपने सपनों के पीछे चल पड़ता है, वही अंततः अपने लक्ष्य तक पहुंचता है। उन्होंने कहा, “जैसा बनना चाहते हो, वैसा सोचो। क्योंकि जैसा सोचोगे, वैसे ही बन जाओगे। वक्त सब कुछ देखता है।” ये पंक्तियां श्रोताओं के भीतर देर तक गूंजती रहीं।

इसके बाद उन्होंने ‘हीरामन’ की कथा सुनाई एक ऐसे व्यक्ति की कहानी, जिसने यह ठान लिया था कि एक दिन दुनिया उसके शब्दों से रोशन होगी। उन्होंने कहा कि कहानी कहना भले कला हो, लेकिन कहानी को सुन पाना उससे भी बड़ी कला है। इस कथा की आत्मीयता ने सभागार में मौजूद हर व्यक्ति को स्वयं से जोड़ लिया।

लगभग 90 मिनट की इस कथात्मक यात्रा में शब्दों ने श्रोताओं को भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने कहा, “सपने वो नहीं होते जो खुली आंखों से देखे जाएं, सपने वो होते हैं जो आपको सोने न दें। संघर्ष की कहानी तभी सुनी जाती है, जब आप सफल हो जाते हैं।” इन शब्दों के बाद सभागार गहरे, अर्थपूर्ण मौन में डूब गया।

स्पाइसी शुगर संस्था की संस्थापक अध्यक्ष पूनम सचदेवा ने कहा कि ‘आलोकनामा’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मबोध और संवेदनाओं की यात्रा है। उन्होंने कहा कि आलोक श्रीवास्तव शब्दों के ऐसे मुसाफ़िर हैं, जिनकी रचनाएं मंच से उतरकर सीधे दिल में उतरती हैं। प्रेम, स्त्री-सम्मान, रिश्तों की जटिलता और सामाजिक सरोकार उनकी रचनाओं की पहचान हैं।

कार्यक्रम के समापन पर स्पाइसी शुगर संस्था की ओर से आलोक श्रीवास्तव को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर हरविजय सिंह बाहिया, डॉ. अशोक विज, सुनीता विज, राजीव भूषण, डॉ. रंजना बंसल, डॉ. नीतू चौधरी, डॉ. रुचि चतुर्वेदी, पवन आगरी, रजत कपूर, दीपिका वासन, अजय शर्मा, लवली कथूरिया, विनीत खेड़ा, वेदपाल धार, डॉ. शर्मिला पंजवानी सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में चांदनी ग्रोवर, सिमरन अवतानी, शिखा जैन, पुष्पा, रेनू, गरिमा, रिंपी जैन और पूजा का विशेष योगदान रहा।