लखनऊ/दिल्ली। यूजीसी के नए नियम ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता विनियम, 2026’ को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। विरोध की आग अब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी तक पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं और हैरानी की बात यह है कि पार्टी के भीतर से ही असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।
यूपी के कई जिलों में रविवार को प्रदर्शन हुए, जबकि सोमवार को भी विरोध जारी रहा। इस बीच भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं ने विरोधस्वरूप अपने पदों से इस्तीफे का एलान कर दिया है।
अलीगढ़ में भाजपा नेता का इस्तीफा
यूजीसी एक्ट को लेकर सवर्ण समाज में नाराज़गी खुलकर सामने आ रही है। अलीगढ़ की इगलास विधानसभा से जुड़े भाजपा संगठन के सोशल मीडिया प्रभारी बताए जा रहे कपिल पंडित ने पार्टी के पद और सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की है। उनका त्यागपत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
हालांकि, इस पर भाजपा के जिला अध्यक्ष कृष्णपाल लाला ने दावा किया है कि संगठन में इस नाम का कोई पदाधिकारी नहीं है।
रायबरेली में किसान मोर्चा नेता ने छोड़ा पद
रायबरेली की सलोन विधानसभा सीट से भाजपा किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी ने भी नई यूजीसी नीतियों से असहमति जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा नियम सामाजिक संतुलन और समानता की भावना के खिलाफ हैं।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजा विरोध पत्र
यूजीसी कानून के खिलाफ विरोध केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है। अखंड भारत हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक शर्मा आजाद ने इस कानून के विरोध में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है।
पत्र में उन्होंने कहा है कि नए नियमों से जाति आधारित भेदभाव को बढ़ावा मिल सकता है और यह समानता के मौलिक अधिकार की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से यूजीसी के इस कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
विरोध के और तेज होने के संकेत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर सरकार ने इस मुद्दे पर स्पष्टता नहीं दिखाई, तो आने वाले दिनों में भाजपा के भीतर असंतोष और गहराने की आशंका है। यूपी समेत कई राज्यों में आंदोलन तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

