आगरा। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड), प्रयागराज का क्षेत्रीय कार्यालय आगरा में स्थापित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। 27 वर्षों से लंबित इस मुद्दे को लेकर संघर्ष समिति ने इसे अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि ब्रज और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का वैधानिक अधिकार बताया है। इसी क्रम में समिति ने जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर शासन स्तर पर तत्काल निर्णय की मांग उठाई है।
संघर्ष समिति के संयोजक व अध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार ने फतेहपुर सीकरी सांसद राजकुमार चाहर और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया से मुलाकात कर आगरा में यूपी बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय खोले जाने की मांग पुरजोर ढंग से रखी। डॉ. नरवार ने कहा कि आगरा की यह जरूरत नहीं, बल्कि अधिकार है, क्योंकि आज भी ब्रज और आसपास के जिलों के लाखों छात्र, अभिभावक और स्कूल प्रबंधन बोर्ड से जुड़े छोटे-छोटे कामों के लिए दूर-दराज के कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
56 लाख परीक्षार्थी, लेकिन सिर्फ 5 क्षेत्रीय कार्यालय
डॉ. नरवार के अनुसार यूपी बोर्ड के अंतर्गत हर साल करीब 56 लाख छात्र हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में शामिल होते हैं। इसके बावजूद परिषद के केवल पांच क्षेत्रीय कार्यालय ही संचालित हैं, जो मेरठ, वाराणसी, बरेली, प्रयागराज और गोरखपुर में स्थित हैं। सीमित कार्यालयों पर अत्यधिक दबाव होने से अंकपत्र, प्रमाणपत्र, नाम या जन्मतिथि संशोधन, सत्यापन, परीक्षा आवेदन और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए छात्रों और विद्यालयों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ती है।
1999 से जारी है मांग, तीन बार भेजे जा चुके प्रस्ताव
संघर्ष समिति ने बताया कि आगरा क्षेत्रीय कार्यालय की मांग नई नहीं है। यह मुद्दा 1999 से लगातार शासन और शिक्षा विभाग के सामने उठाया जा रहा है। समिति के अनुसार 1999, 2001 और 2018 में शासन को औपचारिक प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, जिनमें मेरठ और प्रयागराज क्षेत्र के कुछ जिलों का पुनर्गठन कर आगरा में नया कार्यालय खोलने की अनुशंसा की गई थी। बावजूद इसके, मामला अब तक फाइलों में ही दबा हुआ है।
आगरा में कार्यालय खुलने से 15 जिलों को मिलेगा लाभ
संघर्ष समिति का कहना है कि यदि आगरा में यूपी बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित होता है, तो 15 जिलों को सीधे राहत मिलेगी। इनमें आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, हाथरस, एटा, कासगंज, औरैया, कन्नौज, फर्रूखाबाद, इटावा, झांसी, जालौन (उरई) और ललितपुर शामिल हैं। इससे छात्रों की दौड़-भाग कम होगी और स्कूलों को भी कागजी प्रक्रियाओं में बड़ी सुविधा मिलेगी।
जनप्रतिनिधियों से निर्णायक पहल की अपील
संघर्ष समिति ने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि वे इस मांग को शासन के उच्च स्तर तक मजबूती से उठाएं, ताकि दशकों से लंबित यह न्यायोचित मांग अब और न टले। डॉ. नरवार ने कहा कि आगरा में यूपी बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय खुलना केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है, जिस पर अब तुरंत निर्णय होना चाहिए।

