मायावती का ‘मिशन 2027’ के लिए शंखनाद: कार्यकर्ताओं को दिए दिल्ली से कड़े निर्देश, महिला आरक्षण पर स्टैंड किया साफ़

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को धार देने के लिए बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने कमर कस ली है। बुधवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में मायावती ने स्पष्ट किया कि पार्टी आगामी चुनावों के लिए पूरी तरह सक्रिय है। दिल्ली रवाना होने से पहले उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को कड़ा संदेश दिया कि वे महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर किसी भी प्रकार के भ्रम में न आएं और पार्टी के घोषित स्टैंड पर अडिग रहें।

संगठन की मजबूती और कैडर कैंप पर जोर

मायावती ने निर्देश दिया कि लखनऊ में 31 मार्च 2026 को हुई प्रदेश स्तरीय बैठक के दौरान दिए गए दिशा-निर्देशों का अक्षरश: पालन किया जाए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे कैडर के माध्यम से जनाधार बढ़ाएं और आर्थिक रूप से संगठन को और अधिक सशक्त करें। मायावती ने साफ कहा कि दिल्ली में अपने कार्यों को निपटाकर वे जल्द ही वापस लौटेंगी, लेकिन इस बीच यूपी में चुनाव प्रचार की गति धीमी नहीं पड़नी चाहिए।

​विकास कार्यों का क्रेडिट और कांग्रेस पर हमला

पार्टी प्रमुख ने अपने शासनकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि आज यूपी में जो भी एक्सप्रेस-वे और नोएडा एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स दिख रहे हैं, उनकी रूपरेखा बसपा शासनकाल में ही तैयार की गई थी। उन्होंने तत्कालीन केंद्र की कांग्रेस सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस की ‘जातिवादी मानसिकता’ के कारण उन विकास कार्यों में बाधाएं डाली गईं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे जनता के बीच जाकर यह बताएं कि केवल ‘कानून द्वारा कानून का राज’ और ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ की नीति से ही प्रदेश का सर्वांगीण विकास संभव है।

​महिला आरक्षण: ‘कोटा के भीतर कोटा’ की मांग पर कायम

महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पर बसपा के रुख को दोहराते हुए मायावती ने स्पष्ट किया कि 15 अप्रैल 2026 को जो स्टैंड पार्टी ने लिया था, वही अब भी कायम है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित होना अनिवार्य है।

मायावती के अनुसार, बिना सामाजिक संतुलन के यह आरक्षण अधूरा है और वंचित तबकों की महिलाओं को इसका लाभ तभी मिलेगा जब उन्हें आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को हिदायत दी कि वे इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार का उग्र धरना-प्रदर्शन न करें, बल्कि अनुशासित रहकर जनता को पार्टी के विचारों से अवगत कराएं।