​5 रुपये के नोट के सीरियल नंबर से होता था करोड़ों का खेल, हवाला और व्हाट्सएप कॉल के जरिए होती थी नकली दवाओं की सप्लाई, स्वास्थ्य विभाग ने आगरा में किया सनसनीखेज खुलासा

Regional

आगरा। आगरा में सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले एक बड़े अंतर्राज्यीय नकली दवा गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। औषधि प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने मशहूर फार्मा कंपनी ‘ज़ायडस हेल्थकेयर’ की प्रसिद्ध दर्द निवारक दवा ‘ऑक्सालजिन डीपी’ का नकली संस्करण तैयार करने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है। इस रैकेट का जाल आगरा से लेकर अलीगढ़ और उत्तराखंड के रुड़की तक फैला था।

आगरा में कोतवाली थाना क्षेत्र से नकली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। औषधि प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने ऐसी गैंग का भंडाफोड़ किया है, जो मशहूर फार्मा कंपनी ज़ायडस हेल्थकेयर लिमि की दर्द निवारक दवा ‘ऑक्सालजिन डीपी’ का नकली संस्करण तैयार कर बाजार में बेच रही थी। मामले में चार मुख्य आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। कार्रवाई औषधि निरीक्षक नीलेश शर्मा की तहरीर पर की गई है।

पूरे मामले की शुरुआत तब हुई, जब कंपनी की ओर से आगरा में नकली ऑक्सालजिन डीपी टैबलेट बिकने की शिकायत औषधि विभाग को भेजी गई। शिकायत मिलते ही 6 मई 2026 को औषधि निरीक्षक नवनीत कुमार और नीलेश शर्मा ने कंपनी प्रतिनिधियों के साथ कम्मू टोला, फव्वारा जौहरी बाजार स्थित ‘श्री मेडिकल एजेंसीज’ पर छापा मारा।

छापेमारी के दौरान फर्म के पार्टनर सुरेन्द्र कुमार गुप्ता और उनके पुत्र अंशुल गुप्ता से स्टॉक और लेजर मांगे गए। जांच में सामने आया कि जितनी दवा खरीदी गई थी, बिक्री उससे कहीं अधिक दिखाई गई। वैध बिलों पर सिर्फ 13,160 स्ट्रिप्स खरीदी गई थीं, जबकि बाजार में उससे कई गुना ज्यादा सप्लाई की जा चुकी थी।

‘गोल्डन पैलेस’ के बेसमेंट में मिला अवैध गोदाम

जांच के दौरान सुरेन्द्र गुप्ता की निशानदेही पर टीम पास ही स्थित ‘गोल्डन पैलेस’ बिल्डिंग के बेसमेंट तक पहुंची। यहां भारी मात्रा में दवाओं का भंडारण मिला। जब अधिकारियों ने दोबारा विस्तृत जांच की, तो अंशुल गुप्ता ने स्वीकार किया कि गोदाम का कोई लाइसेंस नहीं था और उसे अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था। मौके से मिली दवाओं को 33 सफेद प्लास्टिक कट्टों में सील कर जब्त कर लिया गया। कंपनी के तकनीकी विश्लेषण में दवाओं के दो बैच पूरी तरह नकली पाए गए।

बस से आती थी नकली दवा, हवाला से होता था भुगतान

पूछताछ में सुरेन्द्र गुप्ता ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि वह अलीगढ़ निवासी मयंक गुप्ता से बिना बिल नकली दवाएं मंगवाता था। दवाओं की सप्लाई बसों के जरिए आगरा पहुंचाई जाती थी। जांच में सामने आया कि अप्रैल 2025 से अब तक करीब 1,78,965 पत्ते नकली ऑक्सालजिन डीपी आगरा पहुंचाए गए।

आरोपी सामान्य कॉल के बजाय व्हाट्सएप कॉल का इस्तेमाल करते थे, ताकि बातचीत रिकॉर्ड न हो सके। भुगतान के लिए हवाला नेटवर्क का उपयोग किया जाता था। 5 रुपये के नोट के सीरियल नंबर को कोड बनाकर लेनदेन कन्फर्म किया जाता था।

रुड़की की फैक्ट्री में होता था निर्माण

मयंक गुप्ता के मोबाइल की गूगल मैप टाइमलाइन और कॉल रिकॉर्ड खंगालने के बाद जांच टीम उत्तराखंड के रुड़की स्थित मै. लेरोई फार्मास्युटिकल्स प्रा. लिमि. तक पहुंची। 14 मई 2026 को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के ड्रग इंस्पेक्टर्स ने संयुक्त छापेमारी की। फैक्ट्री की छत पर भारी मात्रा में खाली एल्युमिनियम फॉयल और एम्बर रंग की पीवीसी कैविटी बरामद हुई, जिनकी पैकिंग शैली नकली ऑक्सालजिन डीपी जैसी ही थी।

टीम ने मौके से 2.7 किलोग्राम खाली स्ट्रिप रोल, 90 किलोग्राम पीवीसी फॉयल जब्त की। फैक्ट्री के डायरेक्टर अन्नू अरोड़ा और संयम अरोड़ा इन सामग्रियों के वैध दस्तावेज और बैच मैन्युफैक्चरिंग रिकॉर्ड पेश नहीं कर सके।

जनता की सेहत से खिलवाड़

औषधि निरीक्षक नीलेश शर्मा के अनुसार, आरोपियों ने लाइसेंस की आड़ में नकली दवाओं का निर्माण, भंडारण और बिक्री कर आम लोगों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ किया है।
फिलहाल पुलिस ने चार मुख्य आरोपियों सुरेन्द्र गुप्ता प्रोप्राइटर, श्री मेडिकल एजेंसीज, आगरा, मयंक गुप्ता प्रोप्राइटर, जय अम्बे मेडिकल एजेंसी, अलीगढ़, अन्नू अरोड़ा डायरेक्टर, लेरोई फार्मास्युटिकल्स प्रा. लिमि., रुड़की और संयम अरोड़ा डायरेक्टर, लेरोई फार्मास्युटिकल्स प्रा. लिमि., रुड़की के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब दवाओं के नमूनों की अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद सक्षम न्यायालय में परिवाद दाखिल किया जाएगा।