आगरा कॉलेज में ‘बौद्धिक संपदा अधिकार’ पर मंथन: विद्यार्थियों को नवाचार और पेटेंट सुरक्षा के दिए गए गुर

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आगरा। आगरा कॉलेज, आगरा के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (IIC) द्वारा ‘बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) एवं पेटेंट सर्च’ विषय पर एक ज्ञानवर्धक व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शोधार्थियों और विद्यार्थियों को उनके नवाचारों की सुरक्षा और पेटेंट प्रक्रिया के प्रति जागरूक करना था।

बौद्धिक संपदा का महत्व

विशेषज्ञ वक्ता डॉ. शिल्पी लवानिया ने छात्रों को बौद्धिक संपदा के विभिन्न पहलुओं जैसे पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, औद्योगिक डिजाइन और भौगोलिक संकेतकों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार न केवल आविष्कारकों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि देश की तकनीकी और आर्थिक प्रगति में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

​पेटेंट सर्च की व्यावहारिक तकनीक

डॉ. लवानिया ने पेटेंट सर्च की वैज्ञानिक विधियों का प्रदर्शन करते हुए गूगल पेटेंट्स, डब्ल्यूआईपीओ (WIPO) पेटेंटस्कोप, इनपास (InPASS) और एस्पासेनेट (Espacenet) जैसे प्लेटफार्मों के उपयोग को समझाया। उन्होंने बूलियन ऑपरेटर्स (AND, OR, NOT) के माध्यम से सटीक सर्च करने की तकनीक सिखाई, जिससे शोध में पुनरावृत्ति (Repetition) से बचा जा सके और नवाचार को मौलिक बनाया जा सके।

महत्वपूर्ण कानूनी मामलों पर चर्चा

व्याख्यान के दौरान उन्होंने भारतीय न्यायिक इतिहास के चर्चित मामलों—जैसे नोवार्टिस बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, बजाज ऑटो बनाम टीवीएस मोटर्स और पेप्सीको बनाम गुजरात फार्मर्स—का विश्लेषण किया। इन केस स्टडीज के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों को बौद्धिक संपदा के कानूनी और व्यावसायिक पहलुओं को बारीकी से समझाया।

​शिक्षक और छात्रों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम का संचालन आईआईसी समिति के मार्गदर्शन में हुआ। इसमें उपप्राचार्य प्रोफेसर पी.बी. झा, आईआईसी अध्यक्ष प्रोफेसर कल्पना चतुर्वेदी, उपाध्यक्ष प्रोफेसर आशीष कुमार समेत अनेक वरिष्ठ प्राध्यापक और शोधार्थी मौजूद रहे। प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों ने पेटेंट प्रक्रिया से जुड़ी अपनी जिज्ञासाएं रखीं, जिनका विशेषज्ञ द्वारा समाधान किया गया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।