व‍िदेशों में भी हो रही है जगत जननी की धूमधाम से पूजा-अर्चना

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आज त्‍यौहार और पूजा पूरी तरह ग्लोबल हो चुका है, हिंदुस्तान की धरती से दूर विदेशों में भी देवी दुर्गा की स्तुति हो रही है। पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश और नेपाल से लेकर सात समन्दर पार इंग्लैंड और स्विटजरलैंड में भी धूमधाम से जगत जननी की पूजा-अर्चना हो रही है।

धूप और अगरबत्ती की खूशबू में लिपट जाता है स्विटजरलैंड

‘स्विसपूजा’ के नाम से स्विटजरलैंड में पिछले 17 सालों से दुर्गा पूजा सेलिब्रेट की जा रही है। स्विसपूजा कमेटी की सदस्य कमलिका चक्रवर्ती के अनुसार यह पूजा 5 दिनों तक चलती है। हिंदी कैलेंडर की तिथि और समय के अनुसार षष्ठी से लेकर विजयादशमी तक पूजन होती है। अमूमन देवी के दर्शन के लिए 800 से 1000 हजार लोग रोज आते हैं पर कोविड नियमों का पालन करने की वजह से इस साल प्रतिदिन 300 विजिटर्स को देवी दर्शन की अनुमति है। इसका रजिस्ट्रेशन पहले ही हो चुका है। पूजा स्थल पर मिलने वाले फूड के कूपन भी ऑनलाइन मिल रहे हैं ताकि फिजिकल कॉन्टेक्ट कम रहे। पूजा स्थल पर एंट्री के लिए कोविड सर्टिफिकेट साथ लाना जरूरी है। साल 2019 तक भारत से पुरोहित बुला कर पूजा की जाती थी। पंडितजी पूजा की सामग्री भी इंडिया से साथ लाते थे। इस बार स्थानीय पुरोहित यह कार्य सम्पन्न करा रहे हैं। पूजा के 5 दिनों तक भारतीय महिलाएं रोज साड़ियां पहनती हैं। कांजीवरम, बनारसी, ढकई साड़ियों में महिलाएं और पुरुष भारतीय पहनावे में नजर आते हैं। यहां एक मिनी भारत देखने को मिलता है।

लंदन में महासेलिब्रेशन का माहौल

लंदन की ‘कामदेन दुर्गा पूजा’ यूरोप में मनाई जाने वाली सबसे पुरानी दुर्गा पूजा है। यह 1963 में शुरू हुई। इस बार 59वां महोत्सव मनाया जा रहा है। पूजा के संयोजक सुनबीर सान्याल के अनुसार, “पूजा पूरे विधि-विधान के साथ होती है। धूप, चंदन और दूसरी पूजा सामग्री हो या भोग-प्रसाद से जुड़ी सारी चीजें यहां मिल जाती है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में भारतीय हैं। इंग्लैंड में 60 से अधिक जगहों पर दुर्गोत्सव होता है लेकिन कामदेन दशहरा को देखने के लिए सबसे अधिक भीड़ उमड़ती है। आमतौर पर 5 हजार लोग मां का दर्शन करने आते हैं। अष्टमी और नवमी के दिन 7 से 8 हजार लोगों की भीड़ माता का आशीष लेने पहुंचती है। पिछले साल कोविड की वजह से वर्चुअल दुर्गा पूजा का आयोजन किया गया। बहुत सारे लोगों ने घर से ही देवी के दर्शन किए क्योंकि बहुत कम लोगों को पंडाल तक आने की अनुमति थी। नारायणी नमोस्तुते की फाउंडर मिठू चैटर्जी की ओर से इस साल लंदन के कामदेन दुर्गा पूजा को साल 2021 का ‘बेस्ट हेरिटेज पूजा-ओवरसीज’ का अवार्ड दिया गया। मिठू बताती हैं, “ इकोफ्रेंडली पूजा व्यवस्था, कोविड नियमों का सख्ती से पालन, बेहतरीन थीम समेत कई दूसरी चीजों को ध्यान में रखने के बाद ही पुरस्कार दिए जाते हैं। ”

रवीन्द्र संगीत और बॉलीवुड क्विज कॉम्पीटिशन

इस दुर्गोत्सव को आनंदोत्सव की तरह मनाया जाता है। कोलकाता और मुम्बई से कलाकार आते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत रवीन्द्र संगीत से होती है। छोटे बच्चे भी गीत-संगीत से भरे कार्यक्रमों का हिस्सा बनते हैं। शादीशुदा जोड़ों के लिए भी ढेर सारे गेम्स होते हैं।जीतने वालों को आयोजकों की ओर से पुरस्कार में फूड कूपन, चॉकलेट्स और दूसरी चीजें दी जाती है। संयोजक समिति की सदस्य अंजलि सान्याल बताती हैं कि हर बार पूजा की थीम अलग होती है। थीम का चुनाव हम भारतीय संस्कृति और परम्परा को ध्यान में रख करते हैं। इस बार की थीम हैं, ‘ हर स्त्री में मां का स्वरूप’। इसमें देसी और विदेशी दोनों भाग ले सकते हैं। बच्चियां भी नन्हीं देवी के रूप में नजर आएंगी।

एशियाई समुदाय और विदेशी भी आते हैं पूजा पंडाल में

इस दिन इंग्लैंड में रह रही बंगाली कम्युनिटी के अलावा गुजराती और दक्षिण भारतीय सब एक पूजा पंडाल के नीचे इकट्‌ठा होते हैं। एशियाई कम्युनिटी के लाेग भी यहां जमा होते हैं। सबसे मजेदार बात तो यह है कि इन दिनों कई विदेशी युवतियां भी हिंदुस्तानी पहनावा, खानपान और उत्सव देखने आती हैं। कुछ ब्रिटिश महिलाएं साड़ियां पहनकर पूजा के कार्यक्रमों में भाग लेती हैं। भारतीय मूल के उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल भी माता का आशीष लेने आते हैं। स्थानीय मेयर भी इस महोत्सव का हिस्सा बनने से पीछे नहीं रहते।

देवी प्रतिमा का प्रबंध कराते हैं उद्याेगपति लक्ष्मी मित्तल

बिजनेसमैन लक्ष्मी मित्तल की ओर से कामदेन दुर्गा पूजा की प्रतिमा की व्यवस्था की जाती है। यह प्रतिमा कोलकाता से बनकर इंग्लैंड आती है। पहले यह शिप से मंगायी जाती थी। इन दिनों प्लेन से भेजी जाती है।यह कई हिस्सों में होती है, जिसे इंग्लैंड में एक साथ जोड़ कर प्रतिमा का रूप दिया जाता है। पहले मिट्‌टी से प्रतिमा बनाई जाती थी पर पिछले 3 सालों से फाइबर ग्लास से तैयार इकोफ्रेंडली प्रतिमा की पूजा की जाती है। पंडित जी जलभरे कलश से जुड़े अनुष्ठान करा कर विसर्जन की विधि सम्पन्न कराते हैं। प्रतिमा ज्यों की त्यों अगली साल के पूजा के लिए रख दी जाती है। स्विटजरलैंड की पूजा में पिछले कई सालों से एक ही देवी प्रतिमा की पूजा इस्तेमाल हो रही है। यह प्रतिमा भी शिप से मंगायी गई थी।

कनाडा, आस्ट्रेलिया और बांग्लादेश में भी दशहरा बांग्लादेश की दुर्गा पूजा बेहद मशहूर है। इसके अलावा कनाडा और आस्ट्रेलिया में भी यह त्योहार पूरे धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन कोविड के बाद कुछ देशों में यह नहीं मनाया जा रहा। लंदन में कुंवारी कन्याओं की पूजा भी होती है। कुंवारी कन्या पूजा नेपाल की दुर्गा पूजा का भी अहम हिस्सा है। दूसरे देशों में रहने वाले बहुत सारे भारतीयों का मानना है कि नई पीढ़ी के कई बच्चों का जन्म विदेशी धरती पर ही हुआ है। इन त्योहारों का सेलिब्रेशन उनको अपनी जड़ों से जोड़े रखेगा। मिट्‌टी से दूर रह कर भी अपने परम्पराओं पर गर्व करेंगे।

साभार:  न‍िशा स‍िन्‍हा

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