आगरा: बाह तहसील क्षेत्र में नहीं सुधरे परिषदीय स्कूलों के हालात, लटके मिले ताले

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आगरा जनपद के तहसील बाह क्षेत्र में परिषदीय स्कूलों के हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं अधिकतर स्कूलों पर ताले लटके मिलते हैं शिक्षक और शिक्षिका हैं स्कूलों में समय से नहीं पहुंच रहे हैं जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों का भविष्य अंधकार में जाता दिखाई दे रहा है। वहीं शिक्षकों की मनमानी पर शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी मौन है। कार्यवाही नहीं होने के कारण शिक्षकों शिक्षिकाओं के हौसले बुलंद हैं।

आपको बता दें शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए प्रदेश सरकार नित नए प्रयास कर रही है। तरह-तरह की सहायक सामग्री विद्यालयों को प्रदान कर शिक्षा की गुणवत्ता का विकास हो सके। वही शिक्षा प्रदान करने वाले शिक्षक शिक्षिकाएं अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते नजर आ रहे हैं।

तहसील बाह क्षेत्र के अधिकतर परिषदीय स्कूलों में अक्सर ताले लटके होने की खबरें सोशल मीडिया दिखाई देती है। इसके बावजूद भी शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी लापरवाह शिक्षकों पर कोई कार्रवाई नहीं करते हैं।

सूत्रों की माने तो स्थानीय कुछ शिक्षक अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते लापरवाह शिक्षकों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। जिसके कारण उनके हौसले बुलंद है और वह समय से अपने स्कूलों में भी नहीं पहुंचते हैं। जिसकी लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। स्कूल समय से नहीं खुलने के कारण उनका भविष्य अंधकार में जाता दिखाई दे रहा है।

मंगलवार को प्राथमिक विद्यालय रैंका में केवल एक शिक्षामित्र मौजूद थीं बाकी शिक्षक शिक्षिकाएं विद्यालय से नदारद थे। शिक्षामित्र पर अन्य शिक्षकों के बारे में पूछे जाने पर जानकारी नहीं होने की बात कही। वही विद्यालय में एक भी विद्यार्थी मौजूद नहीं था। विद्यालय परिसर में लंबी लंबी घास और झाड़ियां खड़ी हुई थी। चारों तरफ गंदगी के अंबार लगे हुए थे।वही गावँ के ही पूर्व माध्यमिक विद्यालय की स्थिति अत्यंत दयनीय थी विद्यालय के गेट पर ताला लटका हुआ था।

ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय यदा-कदा ही खुलता है।वही दोपहर के बाद प्राथमिक विद्यालय रैंका में भी ताला पड़ा हुआ था।कहीं ना कहीं शिक्षा की दुर्दशा के लिए विभागीय अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। जो कि कागजों में ही अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर शिक्षकों की दबंगई को बढ़ावा दे रहे हैं। वहीं ग्रामीणों के नौनिहालों के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की है।

रिपोर्ट- नीरज परिहार

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