आगरा: यमुना-चंबल नदी खतरे के निशान पर, डीएम ने प्रशासनिक अमले के साथ लिया जायजा

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आगरा: यमुना और चंबल नदी में तेजी साथ जलस्तर बढ़ रहा है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण अब यमुना और चंबल नदी खतरे के निशान के करीब पहुँच गयी है। नदी में बढते जलस्तर को लेकर प्रशासन की भी नींद उड़ी हुई है। मंगलवार को जिला अधिकारी खुद नदियों में बढते जलस्तर को लेकर दौरे पर निकले। उन्होंने प्रशासनिक और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ चंबल नदी का निरीक्षण किया और प्रशासन द्वारा किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए की गई तैयारियों का जायजा लिया।

राजस्थान, मध्यप्रदेश की बारिश और काली सिंध से छोडे़ गए पानी के कारण चंबल नदी में फिर उफान आ गया है। मंगलवार सुबह को चंबल का जलस्तर 127.50 मीटर पर पहुंच गया। सोमवार शाम तक 122.50 मीटर था। जलस्तर बढ़ने से पिनाहट समेत कई इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। चंबल नदी खतरे के निशान से महज 02.5 मीटर दूर है। वहीँ प्रशासन द्वारा तटवर्ती इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है।

जिलाधिकारी पीएन सिंह ने बताया कि पीछे से पानी छोड़े जाने के कारण चंबल नदी उफान पर है। नदी में जलस्तर बढ़ रहा है। इसलिए तटवर्ती इलाकों में पहले से ही अलर्ट जारी है और लोगों से सुरक्षित स्थान पर जाने को कहा गया है। बाढ़ चौकियां गठित कर दी गयी है जो तटवर्ती इलाकों पर निगाह बनाए हुए हैं। जिससे किसी भी विषम परिस्थिति से निपटा जा सके। चंबल नदी में खतरे की आशंका को लेकर स्ट्रीमर के संचालन को बंद करा दिया गया है।

लगातार हो रही बारिश और गोकुल बैराज से पानी छोड़े जाने से यमुना नदी भी उफान पर बह रही है। जलस्तर बढ़ने से नदी के तटवर्ती इलाकों में खेत जलमग्न हो गए हैं। कालिंदी सोमवार को लाल निशान से चार कदम दूर बह रही थी। वाटरवर्क्स पर इस साल का सबसे अधिक जलस्तर 491.4 फीट पर पहुंच गया है। गोकुल बैराज से रिकॉर्ड 46433 क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया है। जिला प्रशासन ने राजस्व टीमों को आकस्मिक स्थिति से निबटने के लिए अलर्ट पर रखा है। दयालबाग के निचले इलाके मनोहरपुर, खासपुर, बाईंपुर एहतिमाली सहित सात गांव में खेत यमुना के उफान से जलमग्न हो गए हैं। आगरा में बाढ़ के खतरे का निशान 495 फीट है। वाटरवर्क्स पर यमुना 491.4 फीट पर पहुंच गई है। जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने कहा, ताजेवाला बैराज से डिस्चार्ज में कमी आई है। चार दिन पहले छोड़े गए पानी से जलस्तर बढ़ा है। पहाड़ों पर बारिश होने पर यमुना पर दबाव बढ़ सकता है।

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