राज्य के झंडे वाली बिकनी की Amazon पर बिक्री से कर्नाटक भड़का

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बेंगलुरू। कर्नाटक में ई-कॉमर्स की बड़ी कंपनी Amazon की क़ानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. इसकी वजह है कि Amazon की कनाडा यूनिट की वेबसाइट पर कर्नाटक राज्य के झंडे के रंग वाली बिकनी बिक रही थी.
इस बिकनी में झंडे के मध्य में स्थित प्रतीक चिह्न की तस्वीर भी बनी हुई है. इतना ही नहीं, बिकनी पर अशोक स्तंभ तस्वीर बनी हुई थी, साथ में सत्यमेव जयते भी लिखा हुआ था. यह बिकनी बीकेडीएमएचएचएच ब्रैंड के नाम से बेची जा रही थी.
कर्नाटक के तीन रंगों वाले झंडे में पीली, सफेद और लाल क्षैतिज पट्टियां हैं जो सिंदूर और हल्दी को दर्शाती हैं. इसके बीचों बीच में प्रांतीय प्रतीक गंडाबेरूंडा (एक पौराणिक चिड़िया) है.

इस विज्ञापन का जब दुनिया भर में फैले कर्नाटक के लोगों ने विरोध किया तो अमेज़न डॉट सीए ने इसे वेबसाइट से हटा लिया.
सोशल मीडिया में कर्नाटक के लोगों का आक्रोश इसलिए ज़्यादा भड़का हुआ दिखा क्योंकि दो दिन पहले ही सर्च इंजन गूगल ने कर्नाटक की भाषा कन्नड़ को दुनिया की सबसे भद्दी भाषा करार दिया था.

इसके ख़िलाफ़ भी सोशल मीडिया पर कन्नड़ भाषी लोगों ने काफ़ी विरोध जताया. बाद में गूगल इंडिया ने इस ग़लती के लिए माफ़ी मांगी और कहा कि वह अपने अल्गोरिदम में बदलाव करके यह सुनिश्चित करेगा कि कन्नड़ दुनिया की सबसे ख़राब भाषा नहीं रहे.

कर्नाटक के कन्नड़ भाषा और संस्कृति मामलों के मंत्री अरविंद लिम्बावली ने ट्वीट किया, “गूगल ने हाल ही में हमलोगों का अपमान किया है. हमारा यह जख़्म भरता उससे पहले हमने पाया कि ‘अमेज़न कनाडा’ ने हमारे झंडे और आयकन का इस्तेमाल लेडीज कपड़ों पर किया.”

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “मल्टीनेशनल कंपनियों की ओर कन्नड़ भाषी लोगों का अपमान बंद होना चाहिए. यह हमारे आत्मसम्मान की बात है और हम ऐसे अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे. ‘अमेज़न कनाडा’ को कन्नड़भाषी लोगों से माफ़ी मांगनी चाहिए. हमलोग इसके ख़िलाफ़ क़ानूनी एक्शन लेंगे.”

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी ने ट्वीट किया है, “कन्नड़ और कर्नाटक के मामले में मल्टीनेशनल कंपनियां लापरवाही और अनुचित ढंग से काम कर रही हैं. जानकारी के अभाव में पहले गूगल और अब अमेज़न के कनाडा यूनिट ने ऐसा किया है. इन संस्थानों के पास सही जानकारी क्यों नहीं है?”

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा समय में विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने बताया, “दुनिया के कई देशों में होता है लेकिन हमारे यहां लोग झंडे और प्रतीक चिह्न को नहीं पहनते हैं. हम अपने झंडे को हमेशा ऊंचा रखते हैं. यह ऐसी चीज़ नहीं है जिसे पहना या रौंदा जा सके. हमारे यहां झंडे के सम्मान करने को लेकर भी क़ानून है. मल्टीनेशनल कंपनियों को समझना चाहिए कि कन्नड़ भाषी समुदाय का अपमान करके वह अपने कारोबार को ही नुकसान पहुंचाएंगी, इसलिए बेहतर यही होगा कि वे भारत और कर्नाटक की संस्कृति को समझें.”

-एजेंसियां

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