आगरा: नाट्यशास्त्र के प्रणेता भरत मुनि की जयंती पर बिखरी भारतीय संस्कृति की इंद्रधनुषी छटा

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संस्कार भारती की 10 समितियों के 100 कलाकारों ने गायन, वादन, नृत्य और अभिनय कला से मन मोहा..

सुप्रसिद्ध रंगकर्मी उमाशंकर मिश्रा को नाट्य कर्मी के रूप में किया सम्मानित..

जीवन के नाटक में मानवता का बचे रहना ज़रूरी: प्रो. बीना शर्मा

सभी कला रूपों का आधार है भरतमुनि का नाट्यशास्त्र: बाँकेलाल गौड़

आगरा। संस्कार भारती की रामबाग समिति के तत्वावधान में रविवार को यमुना ब्रिज स्थित श्यामलाल सरस्वती विद्या मंदिर में पंचम वेद के रूप में माने जाने वाले नाट्यशास्त्र के प्रणेता भरत मुनि की जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई।
संस्कार भारती की 10 क्षेत्रीय समितियों के 100 कलाकारों ने गायन, वादन, अभिनय और लोक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों से भारतीय संस्कृति की ऐसी इंद्रधनुषी छटा बिखेरी कि सब लोग भाव विभोर हो गए।

कलाकारों का निर्देशन प्रो. नीलू शर्मा, रूपा गुप्ता, डॉ. गौतम तिवारी, राजीव शर्मा, श्यामवीर सिंह, यतेंद्र सोलंकी, नितिन गुप्ता, शिवाली, ताहिर सिद्दीकी, गौरी, नयना जैन और हरीश अग्रवाल ने किया। समारोह में उमाशंकर मिश्रा को नाट्य कर्मी के रूप में सम्मानित किया गया।

ये रहे प्रमुखत: शामिल

समारोह का संचालन संस्कार भारती के अखिल भारतीय साहित्य प्रमुख राज बहादुर सिंह राज, श्रीमती नूतन अग्रवाल ज्योति और विकास बेरी ने किया।

संस्कार भारती के संस्थापक पद्म श्री योगेंद्र दा का सान्निध्य रहा। राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सुभाष चंद्र अग्रवाल विशिष्ट अतिथि, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बांकेलाल गौड़ मुख्य वक्ता और केंद्रीय संस्थान की निदेशक प्रो. बीना शर्मा मुख्य अतिथि रहीं। प्रमुख चिकित्सक डॉ. पंकज नगायच ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य निर्मला दीक्षित, हरिमोहन सिंह कोठिया, आलोक आर्य, आशीष अग्रवाल, भी मौजूद थे।

इन्होंने किया स्वागत..

एसके मिश्रा, ग्या प्रसाद शर्मा, विजय वीर सिंह सिकरवार, सुरेश कुमार, श्री चंद वर्मा, डॉ. गंभीर सिंह सिकरवार, मलखान सिंह तोमर, अजय अवस्थी, राम अवतार यादव, राजेंद्र गोयल, लक्ष्मीकांत और डॉक्टर यशोधरा यादव यशो ने अतिथियों का स्वागत किया।

मानवता बची रहना ज़रूरी..

समारोह की मुख्य अतिथि और केंद्रीय हिंदी संस्थान की निदेशक प्रो. बीना शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि जीवन के नाटक में सुख-दुख के दृश्य तो आते जाते रहेंगे किंतु हमारी मानवता और का बचे रहना बेहद ज़रूरी है।

सभी कला रूपों का आधार है नाट्यशास्त्र

समारोह के मुख्य वक्ता और संस्कार भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बांकेलाल गौड़ ने कहा कि भरतमुनि का नाट्यशास्त्र सभी कला रूपों का आधार है। इसके 6000 छंदों में मंच डिजाइन, संगीत, नृत्य, भावना, सौंदर्य अभिव्यक्ति और श्रृंगार सहित रंगमंच का हर पहलू शामिल है।

अवसाद को दूर करता है नाटक..

समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रमुख चिकित्सक डॉ. पंकज नगायच ने कहा कि नाटक अवसाद, अकेलेपन और तनाव को दूर करता है। समाज को स्वस्थ और राष्ट्र को सबल बनाने में नाटकों की प्रमुख भूमिका रही है।

-up18 News

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