कांग्रेस में कलह के पीछे अध्‍यक्ष का पद नहीं, कुछ और: रशीद किदवई

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नई दिल्‍ली। कांग्रेस के भीतर उठ रहीं असहमतियों की आवाजें अब बाहर आने लगी हैं। पहले 23 वरिष्‍ठ नेताओं ने नेतृत्‍व पर सवाल उठाते हुए संगठन में आमूल-चूल बदलावों की मांग के साथ अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी। फिर बिहार चुनाव में पार्टी के घटिया प्रदर्शन के बाद आत्‍मनिरीक्षण की बात उठी तो उसभी विवाद हो गया है। कपिल सिब्‍बल, पी चिदंबरम, विवेक तनखा जैसे नेताओं ने पार्टी की हालत पर चिंता जताते हुए जैसे बयान दिए, उसके मुकाबले में अशोक गहलोत जैसे कई नेता उतर आए।

सोनिया ने शुक्रवार को एक अहम फैसले में कुछ समितियां बनाईं जिसमें चिट्ठी लिखकर असहमति जताने वाले कुछ नेताओं को भी जगह दी गई है। इन समितियों में चिट्ठी लिखने वाले जिन नेताओं को रखा गया है, उनमें गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, शशि थरूर, वीरप्पा मोइली शामिल हैं। इसे इन नेताओं के नेतृत्‍व के खिलाफ दिए जा रहे बयानों को रोकने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है मगर सोनिया गांधी की जीवनी लिखने वाले रशीद किदवई के अनुसार कांग्रेसी नेताओं के बीच यह धींगामुश्‍ती अध्‍यध पद के लिए नहीं है। इसके पीछे की वजह कुछ और ही है।

कांग्रेस को खल रही अहमद पटेल की कमी

किदवई के अनुसार चिदंबरम, सिब्‍बल और तनखा जैसे नेता एक प्रभावी पार्टी मैनेजर की कमी को लेकर आवाज उठा रहे हैं। रशीद के अनुसार ये नेता खुद को उस भूमिका में देखना चाहते हैं। उन्‍होंने इन नेताओं के अलावा कमलनाथ, शशि थरूर, दिग्विजय सिंह, कनिष्‍क सिंह, मिलिंद देवड़ा, राजीव शुक्‍ला के भी नाम गिनाए हैं जो खुद को पार्टी में गांधी परिवार के बाद दूसरे नंबर पर चाहते हैं। अब तक अहमद पटेल यह भूमिका निभाते आए थे मगर पिछले महीने से उनकी तबीयत नासाज है। वह गुड़गांव के मेदांता अस्‍पताल में भर्ती हैं।

पटेल के भर्ती होने के बाद से सुस्‍त है कांग्रेस

कांग्रेस के भीतर अहमद पटेल की अपनी अहम भूमिका है। सोनिया या राहुल गांधी से बात करने के लिए पटेल से होकर जाना पड़ता है। चाहे गठबंधन करना हो या अन्‍य विपक्षी दलों के नेताओं से बात करनी हो, पटेल को ही आगे किया जाता है। जब से पटेल अस्‍पताल में भर्ती हुए हैं, फैसले लेने की रफ्तार धीमी हो गई है। किदवई गिनाते हैं पार्टी अब तक राजस्‍थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच शांति समझौता नहीं करा पाई है। AICC के मीडिया हेड का पद भी खाली पड़ा है। पश्चिम बंगाल में पार्टी लेफ्ट का साथ लेगी या नहीं? असम, तमिलनाडु, पुदुचेरी और केरल के विधानसभा चुनाव को लेकर कोई रणनीति नहीं बनी है। कांग्रेस का वॉर रूम भी ठंडा पड़ा है।

किदवई लिखते हैं कि गांधी परिवार जल्‍द से जल्‍द अहमद पटेल के ठीक होने की दुआ कर रहा है। इस बीच कांग्रेस को एक ऐसे मैनेजर की जरूरत है जो पटेल का काम संभाल ले। किदवई के मुताबिक कांग्रेस नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर इसी वजह से चल रहा है।

सोनिया ने मनमोहन की अध्यक्षता में बनाई समितियां

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में तीन समितियों का गठन किया। हरेक समिति में पांच -पांच सदस्य रखे गए हैं। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी बयान में इसकी जानकारी दी गई। गौरतलब है कि आर्थिक, विदेशी मामलों और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को लेकर कांग्रेस लगातार मोदी सरकार पर हमले बोलती आई है। ऐसे में इन मुद्दों को लेकर पार्टी की नीति और लाइन तय करने के लिए सोनिया गांधी ने अलग-अलग मुद्दों के जानकार नेताओं को लेकर तीन समितियों का गठन किया है, जिनकी अध्यक्षता मनमोहन सिंह करेंगे।

अहम समितियों में कौन-कौन शामिल?

आर्थिक मामलों में उनके साथ पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, मलिकार्जुन खड़गे, दिग्विजय सिंह व संयोजक के रूप में जयराम रमेश को रखा गया है जबकि विदेश मामलों से जुड़ी समिति में पूर्व पीएम के अलावा आनंद शर्मा, शशि थरूर, सप्तगिरि उलका व संयोजक के रूप में पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को रखा गया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी समिति में मनमोहन सिंह के राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली, वी वैंथिलिंगम और संयोजक के रूप में विंसेंट एच पाला को जगह दी गई है।

राहुल संग सोनिया पहुंचीं गोवा

दिल्ली मे तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण और प्रदूषण के बीच सोनिया गांधी शुक्रवार को अपने बेटे व पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ गोवा के लिए रवाना हो गईं। दरअसल, सर्दी और प्रदूषण के चलते सोनिया गांधी के सीने में हुए संक्रमण को देखते हुए डॉक्टरों ने सोनिया गांधी को सलाह दी थी कि वह कुछ समय के लिए दिल्ली के प्रदूषित माहौल से दूर रहें।

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली की हवा में मौजूद प्रदूषण के चलते सोनिया गांधी का संक्रमण व उनकी अस्थमा की तकलीफ काफी बढ़ गई, जिसके चलते उन्हें दिल्ली से हटने की सलाह दी गई। इसके बाद ही गांधी परिवार में गोवा जाने का फैसला किया।

-एजेंसियां

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