आगरा: 466 वे जश्न ए उर्स व सर्वधर्म सम्मेलन में गुस्ल , संदल , इत्र, चादरपोशी , गुलपोशी की रस्म अदा की गई

धर्म/ आध्‍यात्‍म/ संस्‍कृति

बुजुर्गों के उर्स में रूहानी व नूरानी फरिश्ते ही बुजुर्गों कि बारगाह को फैजान का समन्दर बनाते हैं । महासचिव विजय कुमार जैन

ऐतिहासिक बुज़ुर्ग हज़रत ख्वाजा शैख सय्यद फतिहउद्दीन बलखी अलमारूफ तारा शाह चिश्ती साबरी के पीर आे मुर्शिद हज़रत ख्वाजा शैख सय्यद निज़ामुद्दीन बल्खी चिश्ती साबरी के 466 वे जश्न ए उर्स व सर्वधर्म सम्मेलन के मौके पर दरगाह मरकज साबरी कम्पाउन्ड आगरा क्लब आगरा में बहुत ही सादगी के साथ दरगाह पर साहबजादे गान और कुछ मुरिदीन ने गुस्ल , संदल , इत्र , चादरपोशी , गुलपोशी की गई ।

फातिहा ख्वानी के बाद मुल्क के अमन चैन की दुआ करते हुए दरगाह मरकज साबरी के महासचिव विजय कुमार जैन ने कहा कि आज उर्स की रस्मो को कोरोना वायरस जैसी महामारी की वजह से उर्स के सभी कार्यक्रम निरस्त करके सादगी के साथ सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के साथ अदा की गई । आगे बोलते हुए कहा कि बुजुर्गो की बारगाह में उर्स के मौके पर रूहानी और नूरानी फरिश्ते रब की बारगाह से आकर बुजुर्गो के जश्न को सजाते हैं और फैजान आे करम की बारिश करते हैं जिससे दरबार में लगन और मोहब्बत के साथ दामन फैलाने वाले की हर मुराद पूरी हो जाती है ।

यही फैजान का समन्दर बुजुर्गो की बारगाह में आने के लिए प्रेरित करता है । मरकज साबरी पर बुजुर्गो का एकता और भाईचारे का पैग़ाम दिया जाता है जिससे मुल्क में अमन चैन कायम रहता है । इस मौके पर वैश्विक महामारी कोरोना के खात्मे की दुआ की गई और फिर से खुशहाली के मुल्क भारत के परचम को पूरी दुनिया में लहराने की खास दुआ की गई ।

जश्ने उर्स व सर्वधर्म सम्मेलन के मौके पर सर्वश्री बुंदु खान, पीरजादा हाजी इमरान अली, पीरजादा हाजी कासिम अली, महासचिव विजय कुमार जैन, रमजान खान, पुरषोत्तम , तरुण साबरी, रफीक साबरी, करुण साबरी, सईद साबरी, विक्रम साबरी, नासिर साबरी , जगदीश शर्मा, बशीर भाई, रूपसिंह , शोभित आदि मुरीद मौजूद रहे ।

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