यूं ही हिट नहीं हुआ हैपिएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजीज का आईपीओ

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नई दिल्‍ली। हैपिएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजीज का आईपीओ 151 गुना अधिक सब्सक्राइब हुआ है। इस IPO में 351 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगी, जबकि सिर्फ 2.33 करोड़ शेयर ऑफर किए गए थे। निवेशकों को अशोक सूता पर पूरा भरोसा है।

अशोका सूता की कंपनी Happiest Minds के IPO को लोगों ने खूब पसंद किया है। वह भारत की इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सर्विसेज इंडस्ट्री के दिग्गज हैं, जिन्होंने तीन बड़ी आउटसोर्सिंग कंपनियों के प्रमुख की भूमिका निभाई है। इनमें से एक है दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड और बाकी दो पब्लिक कंपनियां हैं। उनकी स्टार्टअप कंपनी हैपिएस्ट माइंड्स को इतना तगड़ा रेस्पॉन्स मिला की ये IPO इस दशक का भारत का सबसे सफल आईपीओ बन गया।

151 गुना हुआ सब्सक्राइब

आईटी सर्विसेज कंपनी हैपिएस्ट माइंड्स के 700 करोड़ रुपये के आईपीओ को 151 गुना बोलियां मिली हैं। इस आईपीओ में 351 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगी जबकि सिर्फ 2.33 करोड़ शेयर ऑफर किए गए थे। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि लोगों ने फाउंडर अशोक सूता की विश्वसनीयता पर दाव खेला है। निवेशकों को अशोक सूता पर पूरा भरोसा है।

माइंडट्री वाली सफलता दोहराई

अशोक सूता ने 77 साल की उम्र में एक बार फिर वही सफलता दोहराई है जो उन्होंने 13 साल पहले हासिल की थी। 2007 में उनकी कंपनी माइंडट्री (Mindtree) के आईपीओ को 103 गुना ज्यादा बोलियां मिली थी। कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के कारण उनके 76 फीसदी रेवेन्यू पर कोई असर नहीं पड़ा है। इसमें से आधे से ज्यादा रेवेन्यू एडटेक और हाई-टेक सेक्टरों से आता है।

डिजिटल सेवाओं पर जोर

सूता का कहना है कि उनकी कंपनी का जोर डिजिटल सेवाओं पर है जो उसे दूसरी आईटी कंपनियों से अलग बनाती है। यही वजह है कि हैपिएस्ट माइंड्स पिछले तीन साल में 21 फीसदी की सालाना दर से बढ़ी है जबकि आईटी इंडस्ट्री की ग्रोथ 8 से 10 फीसदी रह गई है। सूता ने आईआईटी-रुड़की से इंजीनियरिंग की और वह श्रीराम रेफ्रिजरेशन इंडस्ट्रीज में काम कर रहे थे। 1985 में अजीम प्रेमजी ने उन्हें अपनी आईटी कंपनी विप्रो को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी।

दस लोगों के साथ की थी माइंडट्री की स्थापना

अगले 14 वर्षों तक सूता विप्रो का चेहरा बने रहे और वाइस चेयरमैन के पद तक पहुंचे। 1999 में उन्होंने दस अन्य लोगों के साथ मिलकर माइंडट्री की स्थापना की। 2007 में कंपनी का आईपीओ बेहद सफल रहा लेकिन इसके बाद कंपनी के संस्थापकों में मतभेद उभरने लगे और सूता ने खुद को माइंडट्री से अलग कर लिया। उन्होंने कंपनी में अपने सारे शेयर बेच दिए और 2011 में 68 साल की उम्र में हैपिएस्ट माइंड्स की स्थापना की।

-एजेंसियां

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