जालोर: नेशनल हाइवे के निर्माण में दुकानों के आगे जाली लगाने से हमारी दुकानें बंद हो रही है- व्यापारी

Press Release

– भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे नेशनल हाइवे 925ए का मामला

– टिड्डी की मार से बर्बाद व्यापारी बोले, जाली लगाने के बाद हमे लगाने पड़ेंगे 600 दुकानों के ताले


वेड़िया। जालोर जिले के चितलवाना उपखंड क्षेत्र के वेड़िया गांव में से निकल रहे नेशनल हाइवे 925 ए के निर्माण के दौरान सड़क के दोनों तरफ सड़क निर्माण करने वाली कम्पनी द्वारा जाली लगाकर सड़क को पैक कर रही है। जिसके विरोध में आज वेड़िया कस्बा बन्द रहा और व्यापारियों ने भारतमाला परियोजना के प्रोजेक्ट मैनेजर, नेशनल हाइवे अथॉरटी के अधिकारियों व जीएसवी कंपनी के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा।

जिसमें व्यापारियों ने बताया कि पहले टिड्डी ने किसानों की फसल बर्बाद कर दी थी, उसके बाद कोरोना के कारण वे बर्बाद हो चुके है। अब सड़क बनाने वाली कम्पनी बिना सर्विस रोड़ निकाले सड़क को जाली लगाकर पैक कर रही है। जिसके कारण करीबन 600 से ज्यादा दुकानें बंद हो रही है। ऐसे में इन दुकानों में काम करने वाले लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। व्यापारी दिलीप जैन ने बताया कि दुकानों के आगे जाली लगाकर बन्द करने देने के बाद व्यापारी अपनी दुकान में माल न तो उतार पाएंगे न ही माल चढ़ा पाएंगे।

वहीं पूरी तरह पैक हो जाने के कारण ग्राहक भी दुकानों तक नहीं पहुंच पाएंगे। जिसके कारण व्यापारियों को दुकानों के मजबूरी में ताले लगाने पड़ेंगे। व्यापारियों ने ज्ञापन में बताया कि अगर हाइवे अथॉरटी के अधिकारियों ने वेड़िया गांव का बाजार बड़ा होने के बावजूद कस्बे में सर्विस रोड नहीं रखी है और जिस सड़क का निर्माण किया है उसके दोनों तरफ जाली लगाकर बन्द कर रहे है। इस दौरान डूंगरा राम थोरी, चम्पा लाल खत्री, जगदीश बिश्नोई, कोशला राम, रामप्रताप जाट, चनणा राम सियोल, रामाराम सियाग, गोमाराम व जयकिशन कड़वासरा सहित अन्य व्यापारी मौजूद रहे।


600 दुकाने प्रभावित, लेकिन अधिकारियों के कानों से जूं तक नहीं रेंगी


व्यापारियों ने अनिश्चितकालीन बन्द के दौरान सोशल डिस्टेसिंग के साथ दिए धरने में बताया कि जब जाली लगाने की जानकारी मिली तब व्यापारियों ने पहले नेशनल हाइवे अथॉरिटी के अधिकारियों को बाड़मेर जाकर अवगत करवाया था। उसके बाद बाड़मेर व जालोर कलेक्टर को ज्ञापन देकर समस्या के समाधान की मांग की थी, लेकिन अधिकारियों के कानों से अभी तक जूं भी नहीं रेंगी है।

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