LAC पर 35 हजार अतिरिक्त जवान तैनात करने जा रहा है भारत

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नई दिल्‍ली। चीन के साथ तनाव को देखते हुए भारत लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल LAC पर सैन्य तैनाती में जबरदस्त इजाफा करने जा रहा है। पूर्वी लद्दाख में तनाव के बाद LAC पर पहले ही अतिरिक्त सैनिकों और हथियारों की तैनाती की जा चुकी है। अब 35 हजार अतिरिक्त जवानों की तैनाती होने जा रही है।
लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (Line of Actual Control) पर जारी तनाव के बीच भारत ने भी चीन की किसी भी हिमाकत का तत्काल मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है। पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के बीच सैन्य तनातनी के लंबा खींचने के संकेतों के बीच भारत चीन से लगी सीमा पर 35,000 अतिरिक्त जवानों (Additional deployment at LAC) की तैनाती करने जा रहा है। ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है।


अधिकारियों ने मीडिया से बातचीत के नियमों का हवाला देते हुए पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि इस कदम से 3,488 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर यथास्थिति बदल जाएगी। 15 जून को पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच खूनी संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था जिसे कम करने के लिए कई दौर की सैन्य बातचीत हो चुकी है। खूनी संघर्ष में भारत के 21 जवान और अफसर शहीद हुए थे जबकि चीन के कम से कम 45 सैनिक मारे गए। पेइचिंग ने अपने सैनिकों के मारे जाने की बात तो कबूल की थी लेकिन कभी भी आधिकारिक तौर पर उनकी संख्या नहीं बताई थी।


गलवानी घाटी में हुई खूनी झड़प के बाद भारत ने भी सीमा पर अतिरिक्त सैनिकों, तोप और टैंकों की तैनाती की है। अधिकारियों ने बताया कि हालात की मांग है कि वहां और भी ज्यादा सैनिकों की तैनाती की जाएगी।


भारत अब तक पाकिस्तान से लगी सीमा पर ही सैन्य तैनाती पर खास ध्यान देता रहा है क्योंकि सीमा पार से आतंकी घुसपैठ और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की नापाक साजिशें चलती रहती हैं। अब भारत ने एलएसी पर भी सैन्य तैनाती बढ़ा रहा है और पूर्वी लद्दाख से लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों में सीमा पर चीन की हर हरकत पर करीबी नजर रख रहा है। भारत अपनी सेना पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाला तीसरा देश है और भारतीय सेना भी दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में है।


मिलिटरी पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाला तीसरा देश होने के बावजूद भारत की सेनाओं के आधुनिकीकरण की बहुत जरूरत है। रक्षा बजट का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा सैलरी और पेंशन के मद में चला जाता है। बजट का बाकी हिस्सा पुरानी खरीदारियों पर खर्च हो जाता है।
एलएसी पर बड़े पैमाने पर अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती पर विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सैन्य बजट पर भार पड़ेगा। दिल्ली बेस्ड थिंक-टैंक मनोहर पर्रिकर इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीजऔर ऐनालिसेज के सीनियर रिसर्च फेलो लक्ष्मण कुमार बेहरा कहते हैं, ‘पाक सीमा से इतर लद्दाख में अतिरिक्त कमिटमेंट से रेवेन्यू कॉस्ट बढ़ेगा लिहाजा सर्विस, रिसर्च एंड डिवेलपमेंट और पूंजीगत खर्च पर और ज्यादा दबाव बढ़ेगा। अगर रक्षा बजट को नहीं बढ़ाया गया तो यह तकलीफदेह होगा।’


-एजेंसियां

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