हर मौसम में और किसी भी समय खाई जा सकती है यह दाल

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इस दाल को खाने से पहले रात और दिन का ध्यान नहीं रखना पड़ता है और ना ही मौसम का खयाल रखना होता है। सुपाच्य और स्वादिष्ट होती है यह दाल। तभी तो 8 महीने के बच्चे से लेकर 80 साल के बुजुर्ग तक हर किसी के लिए सेहत की संपूर्ण गारंटी है यह।


अक्सर दालों को लेकर इस बात का कंफ्यूजन बना रहता है कि कौन-सी दाल कब खाएं क्योंकि कुछ दालें रात को खाने से पेट में दर्द होने लगता है तो कुछ दालें खाने के बाद लगातार गैस बनती रहती है।
ऐसे में मन करता है कि कोई दाल तो ऐसी मिले, जिसे बिना कुछ सोचे-समझे किसी भी मौसम में और दिन-रात किसी भी वक्त में खाया जा सके।


जादुई है यह दाल


आमतौर पर आप जब भी किसी से मूंग-मसूर की मिक्स दाल खाने के लिए कहिए तो लोग इसे बीमारों वाली दाल कहने लगते हैं… खासतौर से देश की हिंदी बेल्ट में। जब किसी का पेट खराब होता है या सर्जरी के बाद मरीज की बॉडी को जल्दी हील करना होता है, तब डॉक्टर्स इस दाल को खाने की सलाह देते हैं।
-लेकिन मूंग-मसूर की दाल वाकई जादुई होती है। यह तासीर में महादिल और स्वाद में साधारण होती है लेकिन गुणों की खान होती है। अब आप इसी बात से समझ लीजिए कि पाचन खराब होने की स्थिति में आयुर्वेद के डॉक्टर्स अपने मरीजों को यही दाल खाने की सलाह देते हैं।


क्या होती है महादिल दाल?


-महादिल उस दाल को कहा जाता है, जिसकी तासीर यानी प्रकृति ना तो ठंडी होती है ना गर्म। इस तरह की दाल को जब हम सर्दी के मौसम में खाते हैं तो यह शरीर को गर्म करने का काम करती है और जब गर्मी के मौसम में खाते हैं तो यह शरीर को ठंडा रखने में सहायता करती है।


अलग-अलग गुणों की बात


-अगर मूंग और मसूर की दाल के बारे में अलग-अलग बात करें तो मूंग की दाल तासीर में ठंडी होती है जबकि साबुत मूंग की प्रकृति गर्म होती है। वहीं मसूर की दाल की तासीर गर्म होती है जबकि साबुत मसूर की तासीर ठंडी होती है। साबुत अनाज से दलकर दाल बनाने की प्रक्रिया के बीच इन अनाजों की प्रकृति में भी परिवर्तन हो जाता है। यह अपने आपमें बहुत बड़े आश्चर्य की बात है लेकिन सच है।


प्रोटीन एलर्जी वाले भी खा सकते हैं इसे


-कुछ लोगों को प्राकृतिक रूप से ही प्रोटीन से एलर्जी होती है। लेकिन शरीर में प्रोटीन की जरूरत तो होती ही है, ऐसे में इन लोगों को प्रोटीन के सप्लिमेंट्स यानी दवाइयां लेनी पड़ती हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यदि सीमित मात्रा में ये लोग मूंग-मसूर की दाल का सेवन करें तो इन्हें एलर्जी जैसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।


खान-पान और मौसम


मौसम मुख्य रूप से तीन तरह के होते हैं, जाड़ा, गर्मी और बरसात। स्वस्थ रहने के लिए हमें मौसम को ध्यान में रखकर ही खान-पान अपनाने की सलाह दी जाती है लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में टाइम पर कुछ खाने को मिल जाए वो ही बड़ी बात होती है! लेकिन फिर भी सेहत हमारी है तो ध्यान भी हमें ही रखना होगा।


-एजेंसियां

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