भारत और भूटान के बीच संयुक्‍त पनबिजली परियोजना पर करार

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नई दिल्‍ली। भारत और भूटान ने 600 मेगावॉट के खोलोंगचु प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए एक बड़ा क़दम बढ़ाया है. दोनों देशों की ये पहली संयुक्त पनबिजली परियोजना है, जिसका निर्माण पूर्वी भूटान के अल्प विकसित त्‍रेशियन्‍ग्‍तसे में किया जाएगा.


जनकारी के मुताबिक इससे जुड़ा समझौता विदेश मंत्री एस जयशंकर और भूटान के विदेश मंत्री तांडी दोरजी और आर्थिक मामलों के मंत्री लोकनाथ शर्मा के बीच भूटान की राजधानी थिम्पू में वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के ज़रिए हुआ.


ये पहली बार है जब भारत और भूटान के बीच कोई पनबिजली परियोजना 50:50 संयुक्त वेंचर में होगी, ना कि गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट एग्रीमेंट के तहत.


समारोह में दोनों विदेश मंत्रियों ने समझौते को भारत-भूटान की साझेदारी के लिए “मील का पत्थर” बताया. इसके तहत बीते 30 साल में 2,100 मेगावॉट के चार हाड्रोपावर प्रोजेक्ट बनाए गए हैं और अन्य दो का फ़िलहाल निर्माण चल रहा है.


खोलोंगचु परियोजना उन चार अतिरिक्त परियोजनाओं का हिस्सा है, जिस पर 2008 में सहमति बनी थी. तब भारत ने प्रतिबद्धता जताई थी कि वो 10,000 मेगावॉट की क्षमता विकसित करने में भूटान की मदद करेगा.


“आपसी हित”


हस्ताक्षर समारोह के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि “हाइड्रो पावर सेक्टर दोनों देशों के आपसी हित के द्विपक्षीय सहयोग का प्रतीक रहा है.”
इस समझौते पर हिमाचल प्रदेश की एक पीएसयू, जेवी पार्टनर सतलज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) और भूटानी ड्रक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन (डीजीपीसी) ने हस्ताक्षर किए.


जयशंकर ने कहा, “मैं दोनों ही जेवी पार्टनर्स को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए बधाई देता हूं और उम्मीद करता हूं कि वो इस प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करेंगे.”


2014 में हुआ क़रार


खोलोंगचु प्रोजेक्ट पर संयुक्त वेंचर की संरचना को लेकर लंबी बातचीत के बाद 2014 में इस इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए थे और इसकी आधारशिला तब रखी गई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ महीनों बाद भूटान की राजधानी थिम्पू गए थे.


हालांकि भारत के नई पावर टैरिफ गाइडलाइन जारी करने के बाद साइट ग्राउंड तैयार करने पर हो रही प्रगति दिसंबर 2016 में रुक गई थी. ये गाइडलाइन क्रॉस बॉर्डर बिजली के ट्रेड पर लगाई गई थी.
फिर भूटान से बातचीत के बाद भारत ने अपनी गाइडलाइन में बदलाव किया था. भूटान के विदेश मंत्री ने कहा कि देरी की वजह से फ़ायदा भी हुआ है क्योंकि ज़मीन पर जो कुछ मसले थे वो सुलझ गए.


तय समझौते के तहत खोलोंगचु विद्युत परियोजना का निर्माण जल्द ही शुरू किया जाएगा और 2025 के मध्य तक इसे पूरा कर लिया जाएगा.


-BBC

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