भारत को चीन के सामने तिब्बत का मुद्दा उठाना चाहिए: लोबसांग सांगेय

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शिमला। तिब्बतियों के निर्वासित राजनीतिक नेता डॉक्टर लोबसांग सांगेय ने भारत से चीन के सामने तिब्बत के मुद्दे को उठाने की माँग की है.


हालांकि भारत और चीन के मध्य मौजूदा तनाव के दौरान तिब्बत के मुद्दे को उठाने की माँग इन दो बड़े एशियाई देशों के बीच और खटास पैदा कर सकती है.


लोबसांग सांगेय ने भारत से तिब्बत के मुद्दे को सुलझाने के लिए और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आग्रह किया है.


चीन ने लंबे समय से तिब्बतियों के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को भी निर्वासित किया हुआ है जो भारत में निर्वासन में रहते हैं. चीन दलाई लामा को एक ख़तरनाक अलगाववादी मानता है.


सांगेय ने कहा है, “निर्वासन झेल रही तिब्बत की सबसे बड़ी आबादी भारत में है. दलाई लामा ख़ुद को भारत का गौरवशाली पुत्र कहते हैं और ऐतिहासिक रूप से, सांस्कृतिक रूप से, इन सभी कारणों से भारत तिब्बत का मुद्दा उठा सकता है.”


भारत सरकार ने हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर तिब्बती विरोध प्रदर्शनों को हतोत्साहित किया है और यहाँ तक कि साल 2018 में विद्रोह की 60वीं वर्षगांठ पर चीन को परेशान नहीं करने के लिए भारत ने तिब्बती रैलियों को प्रतिबंधित किया था.


भारत में धर्मशाला स्थित तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख लोबसांग सांगे ने कहा है कि चीन की विस्तारवादी नीति के कारण स्वायत्तता के लिए तिब्बतियों के संघर्ष पर फिर से ध्यान केंद्रित हो गया है.उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत की अनोखी भूमिका है. फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट क्लब ऑफ़ इंडिया, साउथ एशिया के एक कार्यक्रम में सांगे ने कहा, “भारत में निर्वासित जीवन जी रहे तिब्बतियों की सबसे बड़ी आबादी है. दलाई लामा अपने को गर्व से भारत का बेटा कहते हैं. ऐतिहासिक, भू-राजनीतिक, सांस्कृतिक- इन सभी वजहों से भारत तिब्बत का मुद्दा उठा सकता है.”हाल के वर्षों में भारत सरकार ने तिब्बतियों के बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों को हतोत्साहित किया है और एक बार तो उन्होंने 2018 में विद्रोह की 60वीं वर्षगाँठ के मौक़े पर रैली पर पाबंदी भी लगा दी थी ताकि चीन कहीं नाराज़ न हो जाए.


लेकिन इस महीने पश्चिमी हिमालय के लद्दाख क्षेत्र में संघर्ष हुआ, जिसमें भारत के 20 सैनिक मारे गए. इसके बाद पूर्व भारतीय राजनयिकों और सैनिक जनरलों ने सलाह दी है कि भारत सरकार को तिब्बतियों के आंदोलन के प्रति अपनी अनिच्छा ख़त्म करनी चाहिए.


सांगे ने कहा कि तिब्बत ऐतिहासिक रूप से भारत और चीन के बीच एक बफ़र का काम करता है. ये भारत के लिए उतना ही अहम है, जितना चीन की सुरक्षा के लिए. सांगे ने कहा कि कई वजहों से यहाँ भारत का दाँव ज़्यादा लगा हुआ है, भारत को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और तिब्बत के मुद्दे को सुलझाने में नेतृत्व करना चाहिए.


-BBC

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