आगरा: ”अफोर्डेबिल औद्योगिक भूखण्डों की उपलब्धता” पर प्रबुद्धजनों की वेबीनार

Press Release

आगरा गारमेन्ट हब के लिये जमीन एक चुनौती है परंतु साथ बैठकर सब सुगम बना लेंगे: राज्यमंत्री चौ. उदयभान सिंह

आगरा। नेशनल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज के वेबिनार में सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योगों के राज्यमंत्री चौ. उदयभान सिंह ने कहा क‍ि ”सरकार आगरा के साथ है। गारमेन्ट हब के लिये भूमि की उपलब्धता कराना चुनौतीपूर्ण है। हमें अनुभव के आधार पर भूमि को सुगम कराना है। हम साथ-साथ बैठेंगे और समग्रता से आगरा को बढ़ायेंगे।”

वेबिनार का आयोजन अफोर्डेबिल औद्योगिक भूखण्डों की उपलब्धता कैसे बढ़ायी जाये इस विषय को लेकर था। वेबिनार में मंत्री उदयभान सिंह जी द्वारा यह भी कहा गया कि गारमेन्ट हब के लिये यह जरूरी है कि कितने लोग और किस प्रकार अपनी गारमेन्ट यूनिट लगाना चाहते हैं यह बतायें और उनकी सूची को लेकर हम बात आगे बढ़ायेंगे। इसके लिये एक प्लेटफाॅर्म बनाया जाये, सूची बनायी जाये और आगरा को कैसे उद्योग का हब बनाया जा सकता है इन सूझावों को तैयार किया जाये।

नेशनल चैम्बर के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल एवं आर0टी0आई0 व विधिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष के0सी0 जैन द्वारा आयोजित इस वेबिनार में विषय प्रस्तावना में यह कहा गया कि आगरा की इण्डिस्ट्रयल एस्टेट में कोई भूमि उपलब्ध नहीं है और जो भूखण्ड रिसेल में उपलब्ध हैं उनकी दरें 15 से 20 हजार रू0 प्रति वर्गमीटर हैं। जो कि एक नयी उद्यमी की पहंुंच से बाहर हैं। उ0प्र0 औद्योगिक विकास निगम द्वारा जो थीम पार्क के लिये 1000 एकड़ भूमि अर्जित की गयी थी उस भूमि पर चूंकि थीम पार्क नहीं बन रहा है, वह गारमेन्ट हब और इण्डिस्ट्रयल क्लस्टर के लिये प्रयोग में आनी चाहिये।

इसके अलावा आगरा विकास प्राधिकरण ने थीम पार्क से लगी हुयी ग्राम रायपुर एवं रेहनकला की 450 हैक्टेयर भूमि वर्ष 2011 में अर्जित कर ली है लेकिन प्राधिकरण उसे लेने की आर्थिक स्थिति में नहीं है। किसानों को सन्तोषजनक तरीके से मुआवजा देकर उस भूमि का उपयोग भी औद्योगिक प्रयोजन के लिए हो सकता है। तीसरे विकल्प के रूप में जयपुर रोड पर 273 एकड़ के लैदर पार्क पर इण्डिस्ट्रयल हब बनाने की बात कही गयी। जिससे सभी सहमत थे।

वेबिनार में चीन में कार्यरत सौरभ खण्डेलवाल ने कहा कि वे आगरा में अपनी औद्योगिक इकाई स्थापित करना चाहते हैं लेकिन उन्हें औद्योगिक भूमि नहीं मिल रही है। भूमि की दर अधिकतम 2500/- रू0 प्रति वर्गमीटर होनी चाहिये। फैक्ट्री में श्रमिकों के लिये डोरमैैटरी होनी चाहिये और फैक्ट्रीज की वर्टिकल ग्रोथ होनी चाहिये।

आई0आई0टी0 इंजीनियर रिषी जैन ने टैक्नोलाॅजी और ऑटोमेशन की बात कही और इस पर सभी ने कहा कि टैक्नोलाॅजी के सम्बन्ध में एक अलग से वेबिनार आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया ताकि इस विषय पर विस्तार से चर्चा हो सके।

चीन में एक लम्बे समय तक कार्य कर चुके सन्दीप सिंघानियां ने कहा कि चीन में किराये पर तथा पट्टे पर फैक्ट्री की जगह मिल जाती है। वहां किराया 7-8 रू0 प्रति वर्गफुट होगा। वहां बड़ी सभी फैक्ट्रीयों में रहने के लिए डोरमीटरी की व्यवस्था होती है। प्रदेश में इस सम्बन्ध में एक कानून बनना चाहिये क्योंकि अनेक बार श्रमिकों के बीच में लड़ाई झगड़ा उत्पन्न हो जाता है और जिसमें आत्महत्या तक वे कर लेते हैं।

किशोर खन्ना (रोमसन्स) के द्वारा कहा गया कि आगरा में औद्योगिक भूखण्डों की अत्यन्त आवश्यकता है। जिसकी दर 3000/- रू0 प्रति वर्गमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिये। इण्डिस्ट्रयल क्लस्टर एक्सप्रेसवे के सहारे बनाया जा सकता है।

मथुरा के कृष्ण दयाल अग्रवाल द्वारा यह कहा गया कि विकास प्राधिकरण के विकास शुल्क की दरों एवं विद्युतीकरण की लागत को देखते हुए निजी भूमि पर औद्योगिक इण्डिस्ट्रयल एस्टेट बनाना कठिन कार्य है। औद्योगिक इण्डिस्ट्रयल एस्टेट विकास प्राधिकरण की सीमा के बाहर बनाना चाहिये। क्रडई अध्यक्ष संजय अग्रवाल द्वारा निजी इण्डिस्ट्रयल एरिया की सम्भावनाओं के बारे में बताते हुए कहा गया कि विद्युतीकरण एक बड़ी कठिनाई है जिसमें सरकार को अपने स्तर से सहायता करनी चाहिये।

उद्यमी शिशिर अस्थाना द्वारा दक्षिणी बाईपास के सहारे गारमेन्ट हब बनाने की बात रखी गयी। मनीष अग्रवाल (रावी इवेन्ट्स) द्वारा सर्विस सैक्टर और उद्योगों के लिए जगह चिन्हित करने की मांग की गयी जहां सभागार आदि बन सके। अप्सा अध्यक्ष डा0 सुशील चन्द्र गुप्ता द्वारा गारमेन्ट हब के लिये डिमाण्ड सर्वे करने के बाद में भूमि चिन्हित करने की बात रखी गयी। अमर मित्तल (पूर्व चैम्बर अध्यक्ष) द्वारा निजी इण्डिस्ट्रयल एरिया की कठिनाईयां बतायी गयी।

पूरन डाबर (एफमेक अध्यक्ष) द्वारा आगरा के मास्टर प्लाॅन एवं जोनल प्लाॅन के कार्यान्वित न होने के कारण विकसित भूमि की कमी की बात उठायी गयी। उन्होंने यह मांग की कि कुल महायोजना क्षेत्र में औद्योगिक भूमि का प्रतिशत बढ़ाया जाये। आपसी सहमति के आधार पर भी भूमि को क्रय करके लैण्ड बैंक बनाने की बात कही। उनका मत था कि भूमि की कमी नहीं है प्रबन्धन की कमी है। क्वालिटी इण्डिस्ट्रयल एरिया होने चाहिये।

न्यायमूर्ति राजीव लोचन मेहरोत्रा (सेवानिवृत्त इलाहाबाद उच्च न्यायालय) द्वारा मंहगी औद्योगिक भूमि की आलोचना की गयी। जो उद्यमी उद्योग लगाना चाहते हैं ऐेसे उद्यमीयों की सूची बनाने की आवश्यकता भी बतायी गयी। रिटायर्ड जज प्रवीन कुमार द्वारा भी निजी भूमि पर औद्योगिक स्थानों के बनाये जाने की सम्भावनाओं को तलाशने के लिये कहा गया।

रजत अस्थाना द्वारा निर्बाध विद्युत आपूर्ति की मांग की गयी और स्किल इण्डिया के लिये फैक्ट्री में ही ट्रैनिंग की बात रखी गयी। गारमेन्ट हब की सफलता के लिये नीतियों में सुधार की बात भी जोर-शोर से उठायी गयी।

वेबिनार में यह निर्णय लिया गया कि नीतिगत सुधार क्या-क्या होेने चाहिये और टैक्नोलाॅजी के विषय में हम अपने आपको कैसे आगे ले जा सकते हैं इस पर अगली प्रथक-प्रथक वेबिनार करने का निर्णय भी लिया गया। धन्यवाद ज्ञापन अध्यक्ष राजीव अग्रवाल द्वारा किया गया।

वेबिनार में प्रमोद कुमार अग्रवाल, डाॅ0 वेद प्रकाश त्रिपाठी, एडवोकेट गौरव जैन, विधि अग्रवाल, तरूण अग्रवाल, योगेश जिन्दल, सुनील गुप्ता, प्रहलाद अग्रवाल, अतुल कुमार गर्ग आदि ने भी भाग लिया।

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