राष्ट्र हित में नहीं है PTI की न्यूज़ रिपोर्टिंग: प्रसार भारती

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नई दिल्‍ली। समाचार एजेंसी PTI (प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया) चीनी राजदूत के इंटरव्यू के कारण भारत के ‘स्वायत्त’ जन प्रसारक (पब्लिक ब्रॉडकास्टर) प्रसार भारती के निशाने पर आ गया है.
प्रसार भारती ने कहा है कि PTI द्वारा लिया गया चीनी राजदूत का इंटरव्यू राष्ट्र हित के लिए अहितकर और भारत की अखंडता को चोट पहुंचाने वाला है.


प्रसार भारती ने शनिवार को एक पत्र भेजकर कहा है कि PTI की न्यूज़ रिपोर्टिंग राष्ट्र हित में नहीं है. यह पत्र प्रसार भारती के प्रमुख समीर कुमार ने लिखा है. समीर कुमार का यह पत्र PTI के मार्केटिंग प्रमुख के नाम गया है.


पत्र में कहा गया है, ”पीटीआई के संचालन को लेकर संपूर्णता में चीज़ों को देखा जा रहा है. प्रसार भारती पीटीआई से अपने संबंधों को आगे भी जारी रखने को लेकर समीक्षा कर रहा है. इस संदर्भ में जल्द ही फ़ैसले से अवगत करा दिया जाएगा.”


पूरा विवाद भारत और चीन में सीमा पर तनाव को लेकर उपजा है. 15 जून को दोनों देशों की सेना में हिंसक झड़प हुई थी और इसमें भारत के 20 जवानों की मौत हो गई थी.


प्रसार भारती ने अपने पत्र में लिखा है कि पीटीआई को संपादकीय मामलों पर फिर से चेतावनी दी गई है. पत्र में कहा गया है कि पीटीआई की संपादकीय चूक के कारण ग़लत ख़बर लोगों के बीच फैली और इससे नुक़सान हुआ है.


प्रसार भारती दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो चलाता है. यह केंद्र सरकार के अधीन है लेकिन एक स्वायत्त संस्था है. 2013 से प्रसार भारती PTI की सेवाओं के लिए हर साल 9.15 करोड़ रुपए का भुगतान करता है. हालांकि 2017 से प्रसार भारती ने 25 फ़ीसदी भुगतान को रोक रखा है. प्रसार भारती का कहना है कि वो सेवा शर्तों को लेकर पीटीआई से फिर से बात करना चाहता है.


भारत में चीन के राजदूत सुन वेइडोंग का पीटीआई ने इंटरव्यू किया था. इस इंटरव्यू के सिर्फ़ तीन सवाल और उनके जवाब को भारत में चीनी दूतावास की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है. अपने इंटरव्यू में सुन ने सीमा पर तनाव के लिए भारत पर आरोप लगाए थे. इंटरव्यू में चीनी राजदूत से सवाल पूछा गया था कि क्य अब तनाव ख़त्म हो जाएगा तो सुन वेइडोंग ने कहा था कि यह दायित्व भारत का है न कि चीन का.
संयोग से इसी इंटरव्यू में चीन के राजदूत ने माना था कि 15 जून को एलएसी पर भारत और चीन की सेना में हुई हिंसक झड़प में चीनी आर्मी के जवान भी हताहत हुए थे. इससे पहले चीन इस पर कुछ भी बोलने से बच रहा था.


पीटीआई बीजिंग से भी पूरे विवाद पर रिपोर्ट कर रहा है. पीटीआई का कहना है कि उसकी तरफ़ से चीनी राजदूत से एलएसी पर चीन की आक्रामकता और नए निर्माण कार्य को लेकर भी सवाल किए गए थे लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया था.


पीटीआई का रजिस्ट्रेशन 1947 में हुआ था और 1949 से काम करना शुरू कर दिया था. पंजाब केसरी के सीईओ और प्रधान संपादक अभी पीटीआई के चेयरमैन हैं. यह देश की सबसे बड़ी न्यूज़ एजेंसी है और इसकी कमाई मीडिया घरानों के चंदे से होती है.


-BBC

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